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Saturday, February 7, 2026
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*अब बैरागढ़ के गदेरे में नहीं बनेगी जुलेड़ी पंपिंग योजना ,विकल्प की तलाश में पेयजल निगम, जनवरी 2023 में शुरू हुआ निर्माण कार्य

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  1. *अब बैरागढ़ के गदेरे में नहीं बनेगी जुलेड़ी पंपिंग योजना ,विकल्प की तलाश में पेयजल निगम, जनवरी 2023 में शुरू हूवा निर्माण कार्य*

ऋषिकेश (यमकेश्वर)बैरागढ़ के प्राकृतिक गदेरे में जुलेड़ी योजना का टैंक अब नहीं बनेगा। इसे दूसरी जगह लगवाने के लिए पेयजल निगम विकल्प तलाश रहा है। विदित हो कि 13 करोड़ की यह योजना क्षेत्रीय लोगों के विरोध के बीच प्राकृतिक गदेरे में बनवाई जा रही थी। अगस्त 2023 में आई आपदा मे निर्माण कार्य पानी की तरह बह गया। जनवरी 2023 में शुरू हुए निर्माण कार्य में आठ महीने के अंदर करीब 15 लाख रुपये खर्च किए जा चुके थे।
जल जीवन मिशन योजना के तहत हो रहा था निर्माण,
पेयजल निगम कोटद्वार ने बैरागढ़ गाँव के प्राकृतिक गदेरे के मुहाने पर 13 करोड़ की जुलेड़ी पंपिंग योजना का निर्माण कार्य शुरू किया था, इससे जुलेड़ी, दिउली, पैय्या जुड्डा समेत डेढ़ दर्जन से अधिक गांव लाभान्वित होने थे। 2013 की आपदा ने वैरागढ़ क्षेत्र में भयंकर तबाही मची थी। प्राकृतिक गदेरे उफान पर आ गए थे। उन्हीं गाडेरो में से एक के मुहाने पर जनवरी 2023 से पेयजल निगम ने कार्य शुरू करा दिया।
पूर्व प्रधान अरुण ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम ने निरीक्षण के बाद जो रिपोर्ट शासन को दी वह स्थानीय लोगों की बात से मिल रही । लोगों की बात न मानने वाला स्थानीय प्रशासन वैज्ञानिकों की रिपोर्ट मिलते ही हरकत में आ गया। अब
लोग विरोध करते रहे, काम चालू रहा स्थानीय ग्रामीणों ने गदेरे के मुहाने पर योजना निर्माण को सरकारी धन का दुरुपयोग करार दिया और विरोध सुरू किया।
जुलेड़ी पंपिंग योजना के तहत पेयजल टैंक बनाने के लिए पेयजल निगम की और से बैरागढ़ और आसपास क्षेत्र में दूसरा विकल्प तलाशने का प्रयास किया जा रहा है जल्द ही उचित स्थान तलाशने के वाद योजना का निर्माण कार्य शुरू होगा।
अपशय वर्मा, अवर अभियंता, पेयजल निगम कोटद्वार ने स्थानीय प्रशासन से संबंधित विभाग को बैरागढ़ क्षेत्र में कोई सुरक्षित स्थान तलाशने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना की बाट जोह रहे ग्रामीणों को इसका अब और इंतजार करना पड़ेगा। लोगों का कहना था कि गदेरा उफान पर आने पर जुलेड़ी का टैंक वह जाएगा। इस विरोध के बावजूद निगम के अधिकारी कार्य कराने में जुटे रहे। अगस्त 2023 में
जब गदेरे में उफान सच में आ गया तो निर्माण कार्य जलमग्न हो गया। दो महीने बाद भू-गर्भीय वैज्ञानिकों की टीम ने यहां निरीक्षण किया।

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