
तालघाटी में बरसाती गदेरों में उफान,सड़क मार्ग पर जगह जगह कटाव ।
यसपाल असवाल
यमकेश्वर। बरसात शुरु होते ही यमकेश्वर विकासखंड के तालघाटी क्षेत्र के करीब 12 गांवों में तीन महीने के लिए जिंदगी रुक सी जाती है। नदी और गदेरे उफान पर आने से यातायात सुविधा ठप हो जाती है। बीमार को डंडी- कंडी के सहारे रोड तक पहुंचाना पड़ता है। लोग भगवान से दुआ करते हैं कि बरसात में कोई बीमार न पड़े।
बरसात शुरु होते ही बिंदबासिनी गंगा भोगपुर मार्ग जून से बंद हो जाता है। बरसात खत्म होने पर सितंबर अंत तक खुलने की उम्मीद रहती है। वर्तमान में ताल – खैराणा- कांडाखाल सड़क भी भूस्खलन के कारण बंद है। जुलेडी धारकोट मार्ग ढोसण से आगे टूटते रहता है। जिस कारण ढोसन से आवागमन बंद रहता है। गांव में यदि कोई बीमार हो जाता है तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने में परेशानी होती है।
वुकंडी, बिंदवासिनी, आमकाटल, घोरगड्डी, खैराणा, ताल, बांदणी, कंट्रा, सिलसारी, तिमली, गुजराड़ी, घुरकाटल
यातायात ठप होने से डंडी-कंडी के सहारे बीमार को सड़क तक पहुंचाना पड़ता
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तालघाटी क्षेत्र में यातायात अवरुद्ध न हो इसके लिए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों बरसात में भी रोड खोलने के निर्देश दिए जाएंगे।

चतर सिंह चौहान, एसडीएम,
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यमकेश्वर आदि गांवों के जिन लोगों को जांच के लिए हर सप्ताह या फिर 15 दिन में ऋषिकेश अस्पताल जाना पड़ता है, वह नदियों और गदेरों का जलस्तर बढ़ने पर नहीं जा पाते।
यातायात बंद होने के कारण बीमार लोगों को पैदल डंडी-कंडी और कुर्सी के सहारे दिउली तक पहुंचाना पड़ता है। इन तीन महीने किसान अपनी उपज को ऋषिकेश नहीं पहुंचा पाते। तालघाटी के ग्रामीण राशन, तेल, चायपत्ती, चीनी आदि जून में ही खरीद कर रख लेते हैं। यातायात अवरुद्ध होने से घाटी के करीब तीन हजार लोग प्रभावित होते हैं।

