
20 साल बाद जारी हुआ गैर-जमानती वारंट, संघर्षों के प्रतीक रघुनाथ सिंह नेगी

वर्ष 2005 में श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए हुए आंदोलन की गूंज अब दो दशक बाद फिर सुनाई दी, जब उसी आंदोलन के सिलसिले में जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो गया।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2005 में श्रमिकों के हक की लड़ाई के दौरान दर्ज हुए दो मुकदमों में अब जाकर न्यायालय से जमानत कराई गई है।
काबिल-ए-गौर है कि मंत्री, विधायक या सांसद तो महज़ एक माह में धनबल, अप्रोच और बिरादरी के सहारे बन जाते हैं, लेकिन असली “नेता” वही होता है, जो जनता के बीच से निकलता है, जो जेल जाता है, पुलिस की लाठियां खाता है, अपनी सुख-सुविधाएं त्याग कर जनता के अधिकारों के लिए तपती सड़कों पर उतरता है।
रघुनाथ सिंह नेगी ने यही रास्ता चुना। संघर्षों को साथी बनाया, आंदोलनों को अपना धर्म और जनता की सेवा को जीवन का लक्ष्य। कई मुकदमों और वर्षों के संघर्षों के बाद भी उनका हौसला आज भी अडिग है।
यही कारण है कि उन्हें “संघर्षों का पर्याय” और सच्चे अर्थों में एक “आईएसएस” यानी इंडियन सोशल सर्विस” का सिपाही कहा जाता है।
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