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Saturday, February 21, 2026
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संघ कार्य की शताब्दी यात्रा केवल इतिहास नहीं, भविष्य की संभावनाओं की नींव

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उत्तराखंड की राजधानी Dehradun में आयोजित कार्यक्रम में संघ कार्य की शताब्दी यात्रा को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि 1925 में स्थापित Rashtriya Swayamsevak Sangh का शताब्दी वर्ष केवल अतीत का स्मरण नहीं, बल्कि भविष्य के भारत के निर्माण का संकल्प है।

कार्यक्रम में कहा गया कि संघ की यात्रा सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न आयामों से होकर गुजरी है। समाज के प्रत्येक वर्ग—युवा, महिला, किसान और बुद्धिजीवी—को जोड़ते हुए संगठन ने सेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी जीवन मूल्यों को बढ़ावा दिया है।

लेखक Padam Singh ने अपने संबोधन में कहा कि शताब्दी वर्ष समाज में सकारात्मक परिवर्तन का अवसर है। उन्होंने जोर दिया कि “विकसित भारत” के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नागरिक कर्तव्यों, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों का पालन आवश्यक है।

कार्यक्रम में सरसंघचालक Mohan Bhagwat के विचारों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने समाज जीवन में समन्वय, आत्मनिर्भरता और संगठन शक्ति को प्रमुख आधार बताया है।

वक्ताओं ने कहा कि आगामी वर्षों में Uttarakhand सहित पूरे देश में सामाजिक समरसता, पर्यावरण जागरूकता और परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया जाएगा। शताब्दी यात्रा के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक सकारात्मक परिवर्तन का संदेश ले जाने का संकल्प दोहराया गया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण के सामूहिक संकल्प और “सबका साथ, सबका प्रयास” की भावना के साथ हुआ।

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