नेपाल में हुए खौफनाक भूस्खलन के चलते पहाड़ का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूटकर चमेलिया नदी में समा गया है जिसके चलते वहां हजारों लीटर पानी जमा होकर एक झील बन चुकी है। अगर किसी वजह से ये झील टूटी तो उत्तराखंड में वो तबाही आ सकती है जिसकी हम और आप कल्पना भी नहीं कर सकते।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पिथौरागढ़ प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सरहद पर तैनात SSB और ITBP को चौंकन्ना कर दिया गया है। लेकिन नेपाल से आ रही ये अनजानी आफत कितनी बड़ी है? आखिर क्या हमारा उत्तराखंड एक और जल प्रलय के मुहाने पर खड़ा है? चलिए जानते है इस आर्टिकल में
नेपाल में कुदरत का कहर
पड़ोसी देश नेपाल के गेठीगाड़ा गांव के पास कुदरत का ऐसा कहर बरपा जिसने भारतीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है। नेपाल के दार्चुला जिले के गेठीगाड़ में एक बड़ा भूस्खलन हुआ जिसके चलते एक बड़े पहाड़ का टुकड़ा महाकाली नदी की सहायक नदी चमेलिया में आ गिरा।
अब उत्तराखंड में अचानक बाढ़ की आशंका
भूस्खलन से नदी में मलबा जमा होने की वजह से अब उत्तराखंड में अचानक बाढ़ की आशंका जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर लगातार बारिश के बीच और मलबा नदी में गिरा और बहाव पूरी तरह रुक गया तो जलभराव बढ़ सकता है।
पिथौरागढ़ में मचा हड़कंप
बाद में मलबा टूटने या पानी अचानक निकले की स्थिति में तेज बहाव नेपाल से भारत की तरफ आने वाली काली नदी के रास्ते सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही ला सकता है। जैसे ही नेपाल के बैतड़ी और दार्चुला जिलों के अधिकारियों ने भारतीय प्रशासन को इस मंडराते खतरे का अलर्ट भेजा तो पिथौरागढ़ में हड़कंप मच गया।
अभी फिलहाल काली नदी शांत
अधिकारियों का साफ कहना है कि अभी काली नदी शांत दिख रही है, हो सकता है कि लगातार बारीश के चलते ये कोई बड़ी आपदा में तबदील हो जाए। प्रशासन ने काली नदी के किनारे बसे तमाम गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है साथ ही लोगों को सख्त हिदायत दे दी गई है कि कोई भी शख्स, किसी भी सूरत में नदी के किनारे न जाए। हालांकि झीलों के बनने से उत्तराखंड में आपदा का खतरा कोई नया मसला नहीं है।
उत्तराखंड में 1200 ग्लेशियर झीलें
उत्तराखंड में पहले से ही कुल 1200 ग्लेशियर झीलें हैं जो राज्य में कभी भी एक बड़ी तबाही ला सकती हैं और इनमें 13 झीलें तो ऐसी हैं जो बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं। अगर इनमें थोड़ा भी हलचल हुई तो केदारनाथ, धराली और रैंणी जैसी तबाही दोबारा आने में देर नहीं लगेगी। फिलहाल काली नदी का बहाव सामान्य है और ऐसी किसी बड़ी आपदा के लिए पिथौरागढ़ प्रशासन अलर्ट मोड़ पर है और लगातार निगरानी कर रहा है।SSB और ITBP के जवान पूरी तरह मुस्तैद है।
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