चुनाव हारा, सियासी सफर खत्म समझा…फिर बने मुख्यमंत्री, जानें CM Dhami की कहानी

CM Dhami Biography: साल था 2022, सीट थी खटीमा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे पुष्कर सिंह धामी, जो अपनी ही विधानसभा सीट से चुनाव हार गए। लेकिन बावजूद इसके पार्टी ने उन्हें पूरे प्रदेश की कमान सौंप दी। आखिर क्या था 45 साल के इस नेता में जो चुनाव हारने के बावजूद, बीजेपी हाईकमान ने तय किया कि मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी ही रहेंगे।आज यानी 16 सितंबर को सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी का जन्मदिन है। तो चलिए आपको उत्तराखंड के सबसे चर्चित नेता की वो स्टोरी बताते हैं जिसने उत्तराखंड की सियासत को हमेशा हमेशा के लिए बदल दिया।

16 सितंबर 1975 को पिथौरागढ़ में हुआ जन्म

ये कहानी शुरू होती है पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट कस्बे के तुण्डी गांव से। 16 सितंबर 1975 को जन्मे पुष्कर सिंह धामी का बचपन अभावों और अनुशासन के बीच बीता। पिता शेर सिंह धामी सेना में थे।इसलिए देशभक्ति और सख्त मिजाज उन्हें विरासत में मिला। परिवार बाद में खटीमा आ गया। जहां उन्होंने कुछ वक्त बिताया। इसके बाद पुष्कर सिंह धामी पढ़ाई के लिए लखनऊ चले गए। लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही उन्हें राजनीति का चस्का भी लग गया।

90 के दशक में ABVP से जुड़े, कोश्यारी के OSD बने CM Dhami Political Career

90 के दशक में पुष्कर सिंह धामी ABVP से जुड़े, सड़कों पर उतरेसनारे लगाए और यहीं से उन्होंने राजनीति की बारीकियां भी सीखीं। उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा यू-टर्न आया साल 2001 में, जब उत्तराखंड नया-नया राज्य बना था। भगत सिंह कोश्यारी मुख्यमंत्री बने और उन्होंने पुष्कर सिंह धामी को अपना OSD बना दिया।

यानी जिस मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वो आज बैठे हैं, उस मुख्यमंत्री दफ्तर के काम-काज को समझने का तजुर्बा धामी को 25 साल पहले ही मिल चुका था। इसके बाद पुष्कर सिंह धामी युवा मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष बने।

2012 और 2017 में खटीमा से बने विधायक

फिर 2012 और 2017 में खटीमा से विधायक बनकर विधानसभा पहुंच गए। 4 जुलाई 2021 को अचानक दिल्ली से उनके लिए बुलावा आया। जिसके बाद महज 45 साल की उम्र में पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बना दिया गया। पुष्कर सिंह धामी हमारे राज्य के सबसे युवा सीएम बने।

2022 में पारंपरिक सीट खटीमा से चुनाव हारे

लेकिन फिर वो साल 2022 में सीएम अपनी ही पारंपरिक सीट खटीमा से चुनाव हार गए। चुनावी विश्लेशकों ने मान लिया की अब धामी का राजनीतिक करियर खत्म हो गया है। लेकिन तभी दिल्ली से एक ऐसा फैसला आया जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया।

चुनाव हारने के बाद भी बने मुख्यमंत्री

पार्टी ने हार के बावजूद धामी की काबिलियत पर भरोसा जताया। उन्हें दोबारा उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बना दिया। उसके बाद उन्होंने चंपावत से उपचुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा लौट आए। पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के इतिहास में इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री बन गए, जिन्होंने लगातार दूसरी बार सत्ता संभाली। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही धामी ने ऐसे-ऐसे फैसले लिए, जिसके बाद उनकी ही पार्टी के नेता उन्हें धाकड़ और धुरंधर बताने लगे।

पुष्कर सिंह धामी सीएम पद पर लिए कई ऐतिहासिक फैसले

पुष्कर सिंह धामी का पहला ऐतिहासिक फैसला 27 जनवरी 2025 को आया। जब उत्तराखंड में यूसीसी लागू किया गया। उत्तराखंड आजाद भारत का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता लागू की।

उनका दूसरा बड़ा फैसला था 11 पहाड़ी जिलों में बहारी लोगों के कृषि और बागवानी जमीन खरीदने पर सख्त रोक लगाना।
वहीं उन्होंने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ भी सीधा एक्शन लिया। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30% आरक्षण दिया। सबसे बड़ा एक्शन- नकल माफियाओं के ऊपर लिया गया। जहां उन्होंने कानून बनाया जिसमें नकल माफियाओं को 10 साल की जेल और 10 करोड़ का जुर्माना भरना पड़ेगा।

सीएम धामी का राजनितिक सफर कितना बड़ा?

साथ ही जबरन धर्मांतरण के खिलाफ भी धामी सरकार ने कानून बनाया। किसी राजनीतिक व्यक्ति की पहचान आमतौर पर उसकी राजनीतिक पारियों और सामाजिक जीवन को मिला कर मुकम्मल होती है। व्यक्तिगत तौर पर देखा जाए तो सीएम धामी एक नेकदिल इंसान हैं लेकिन राजनीतिक रूप से उनका कद भविष्य में कितना ऊंचा होगा ये तय जनता करेगी और इतिहास करेगा।

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