उत्तराखंड ने मत्स्य पालन (फिशरीज) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा हिमालयी राज्य बन गया है जिसने नेपाल को ट्राउट (Trout) मछली का निर्यात (एक्सपोर्ट) शुरू किया है और साथ ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) को ट्राउट मछली की सप्लाई करने वाला पहला राज्य बना है।
इसी सिलसिले में 19 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ कलेक्टरेट में ‘पिथौरागढ़ कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर’ को लेकर एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लेखी ने की। इस हाइब्रिड (भौतिक और ऑनलाइन) समीक्षा बैठक में ITBP के अपर महानिदेशक (ADG) संजय कुमार गुंज्याल, मत्स्य पालन विभाग (भारत सरकार) की संयुक्त सचिव श्रीगुंजन कृष्णा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप महानिदेशक डॉ. जे. के. जेना, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. बी. के. बेहेरा, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के अध्यक्ष पी. जवाहर, पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी (DM) आशीष कुमार भटगांई, उत्तराखंड के मत्स्य निदेशक चंद्र सिंह धर्मशक्तू इसके अलावा अन्य हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि, नाबार्ड (NABARD), आईसीएआर-डीसीएफआर (ICAR-DCFR), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के अधिकारी और स्थानीय ट्राउट किसान भी इस बैठक से जुड़े।
हिमालयी क्षेत्रों में ट्राउट खेती का बड़ा महत्व
बैठक के दौरान केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लेखी ने बताया कि भारत के हिमालयी क्षेत्रों का वातावरण और पानी का तापमान ‘रेनबो ट्राउट’ (Rainbow Trout) मछली के पालन के लिए बेहद अनुकूल है। भारत सरकार ने देशभर में 34 मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किए हैं, जिनमें से पिथौरागढ़ में कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर बनाया गया है।
पिथौरागढ़ के डीएम आशीष कुमार भटगांई ने जिले की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को सही दाम दिलाने, ट्राउट के उत्पाद बनाने और बाजार (मार्केट लिंकेज) को मजबूत करने की जरूरत है। जिला प्रशासन मत्स्य विभाग के साथ मिलकर इन सभी दिक्कतों को दूर करेगा।
सेना और ITBP को सप्लाई बढ़ाने पर जोर
बैठक में ITBP के ADG संजय कुमार गुंज्याल ने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों जैसे सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में तैनात ITBP जवानों के लिए ट्राउट मछली की बहुत बड़ी मांग है। इस पर केंद्रीय सचिव ने अन्य हिमालयी राज्यों को भी सलाह दी कि वे भारत सरकार के मत्स्य विभाग के साथ मिलकर सेना और ITBP को मछली सप्लाई करने के लिए एमओयू (MoU) साइन करें।
मछली पालक रेखा जोशी की सफलता की कहानी
समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय सचिव ने स्थानीय ट्राउट किसानों से सीधी बात की। किसानों ने अच्छी गुणवत्ता वाले दाने (फीड) की उपलब्धता, सही दाम और ट्रेनिंग की मांग रखी। मुनस्यारी के एक किसान ने कहा कि दाने और भाड़े (ट्रांसपोर्ट) के खर्च को देखते हुए ITBP को दिए जाने वाले दाम थोड़े कम हैं। वहीं, महिला मत्स्य पालक रेखा जोशी ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि वे ट्राउट मछली से कई उत्पाद जैसे फिश बॉल्स, फिश फिंगर्स और फिश मोमोज तैयार कर रही हैं, जिससे वे रोजाना लगभग 5,000 रुपये की बिक्री कर लेती हैं।
भविष्य का रोडमैप और स्टार्टअप्स को बढ़ावा
केंद्रीय सचिव ने आने वाले 5 सालों के रोडमैप पर चर्चा करते हुए कहा कि ठंडे पानी की मछली पालन में युवाओं और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। ट्राउट को एक जगह से दूसरी जगह भेजने और एक्सपोर्ट करने के लिए हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के पास कोल्ड स्टोरेज की सुविधा तैयार की जाएगी। ICAR के उप महानिदेशक डॉ. जे. के. जेना ने बताया कि ICAR किसानों को वैज्ञानिक तरीकों और तकनीक से मछली पालन सिखाने में पूरी मदद कर रहा है। MPEDA के अध्यक्ष पी. जवाहर ने कहा कि किसानों को मछली के रखरखाव, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि हमारी ट्राउट देश और दुनिया के बाजारों में मुकाबला कर सके। उत्तराखंड की यह पहल न केवल पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खोलेगी, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
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