उत्तराखंड सरकार ने राज्य के डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले प्राध्यापकों (प्रोफेसरों) को एक बड़ी सौगात दी है। शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्ट शोध पत्र प्रकाशन प्रोत्साहन योजना’ के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है। उच्च शिक्षा अनुभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, राज्य भर के 90 चयनित प्राध्यापकों के लिए कुल 2,84,854 (दो लाख चौरासी हजार आठ सौ चौवन रुपये) की राशि मंजूर की गई है। यह फैसला राज्यपाल की स्वीकृति के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजा गया है।
किन प्राध्यापकों को मिला फायदा?
शासन की ओर से जारी सूची के अनुसार, राज्य के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों, दून विश्वविद्यालय, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, शोभन सिंह जीना विश्वविद्यालय और श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर में कार्यरत शिक्षकों को इस योजना का लाभ मिला है। प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाले प्राध्यापकों में विज्ञान, गणित, रसायन विज्ञान, जूलॉजी (जन्तु विज्ञान), बोटनी (वनस्पति विज्ञान), कॉमर्स, मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशन, आर्ट्स और पर्यावरण विज्ञान जैसे कई विषयों के शोधकर्ता शामिल हैं।
सबसे अधिक प्रोत्साहन राशि पाने वाले प्रोफेसर
श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय परिसर, ऋषिकेश की गणित की प्रोफेसर डॉ. अनीता तोमर को 20,497 रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मालदेवता (रायपुर, देहरादून) की जन्तु विज्ञान की प्राध्यापक प्रो. (डॉ.) मधु थपलियाल को 13,374 मंजूर किए गए हैं। कुमाऊँ विश्वविद्यालय (नैनीताल) की बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. वीना पांडे को 12,261 की राशि मिली है। दून विश्वविद्यालय से डॉ. अरुण कुमार, डॉ. सुधांशु जोशी, डॉ. स्मिता त्रिपाठी और डॉ. उज्जवल कुमार जैसे शोधकर्ताओं को भी 9 हजार से 13 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसके अलावा चकराता, थत्यूड़, लोहाघाट, जोशीमठ, रानीखेत, पिथौरागढ़, अगस्त्यमुनि, अगस्त्यमुनि, चौबट्टाखाल, और कोटद्वार जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के राजकीय डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को भी 500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि पब्लिकेशन के आधार पर प्रदान की गई है।
भुगतान और कड़े नियमों के निर्देश
उत्तराखंड शासन के संयुक्त सचिव प्रदीप मोहन नौटियाल की ओर से जारी इस आदेश में उच्च शिक्षा निदेशक (हल्द्वानी) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत धनराशि का आहरण कर इसे तुरंत संबंधित प्राध्यापकों को हस्तांतरित किया जाए।
शासनादेश में कहा गया है कि निदेशक को धनराशि जारी करने के बाद इसका उपयोगिता प्रमाण-पत्र शासन को जल्द से जल्द जमा करना होगा।लाभान्वित प्राध्यापकों द्वारा जमा किए गए रिसर्च और पब्लिकेशन से जुड़े कागजातों का दोबारा अच्छी तरह से परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर दस्तावेजों में किसी तरह की त्रुटि, विसंगति या अनियमितता पाई जाती है, तो जारी की गई राशि को तुरंत वापस वसूलने (रिकवरी) की सख्त कार्यवाही की जाएगी।
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नया उत्साह
उत्तराखंड सरकार का यह कदम उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि इस प्रकार प्रोत्साहन राशि मिलने से कॉलेजों में पढ़ा रहे युवा और वरिष्ठ शिक्षकों में अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के जर्नल्स में अपने रिसर्च पेपर प्रकाशित करने की होड़ बढ़ेगी।विशेषकर पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों के महाविद्यालयों में पढ़ा रहे प्रोफेसरों के लिए यह योजना काफी मददगार साबित हो रही है, जिससे राज्य में शोध की संस्कृति को बल मिलेगा।
Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.








