सिमली बेस अस्पताल मांग: गैरसैंण में भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, विधायक नौटियाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर चल रहा जन-आंदोलन अब और अधिक उग्र हो गया है। कर्णप्रयाग क्षेत्र के सिमली में स्वीकृत 200 बेड के बेस अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीणों का गुस्सा आखिर सड़कों पर फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के उदासीन रवैये से नाराज होकर भाजपा के स्थानीय कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल और प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की तथा अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया।

मंत्री विधायकों के लौटते समय विरोध प्रदर्शन

गैरसैंण में आयोजित राज्य विधानसभा के सत्र की समाप्ति के तुरंत बाद जब मंत्रियों और विधायकों का काफिला वापस लौट रहा था, तब धरनास्थल पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क किनारे लामबंद होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। जैसे ही विधायक अनिल नौटियाल और अन्य जनप्रतिनिधियों के वाहन वहां से गुजरे, प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अपने काफिलों का रास्ता घेरने की कोशिश की। ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर “स्वास्थ्य सुविधाएं देना बंद करो राजनीति”, “सिमली अस्पताल का काम शुरू करो” और “क्षेत्रीय विधायक होश में आओ” जैसे तीखे नारे लगाए। वीआईपी काफिलों की रवानगी के समय अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। हालांकि, पुलिस बल ने कड़ी मशक्कत के बाद काफिलों को सुरक्षित बाहर निकाला।

विधायक को बताया ‘गुमशुदा’, पुतला बनाकर जताया अनोखा विरोध

कथित उपेक्षा से आहत होकर एक अनोखा और तीखा विरोध प्रदर्शन भी दर्ज कराया। धरनास्थल पर ग्रामीणों ने विधायक अनिल नौटियाल का एक पुतला स्थापित किया, जिस पर ‘गुमशुदा विधायक’ की तख्ती टांगी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्रीय विधायक ने सिमली बेस अस्पताल जैसे अति-महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे से पूरी तरह से आंखें मूंद ली हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब जनता बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दर-दर भटक रही है, तब उनके जनप्रतिनिधि मौन साधे हुए हैं। विधायक के पुतले के जरिए ग्रामीणों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि जनप्रतिनिधि अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से गायब हो चुके हैं।

200 किलोमीटर की पैदल यात्रा से गैरसैंण तक गूंज

गौरतलब है कि सिमली बेस अस्पताल की मांग को लेकर ग्रामीणों का यह संघर्ष नया नहीं है। इससे पूर्व अपनी आवाज को शासन के कानों तक पहुंचाने के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों ने चमोली से देहरादून तक 200 किलोमीटर से अधिक की कठिन पैदल यात्रा (पांव यात्रा) तय की थी। कड़ाके की धूप और कठिन परिस्थितियों की परवाह किए बिना देहरादून पहुंचे इन ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था। हालांकि, लंबे समय के आश्वासन के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण अब यह गूंज गैरसैंण के मंच पर और भी भयावह रूप ले चुकी है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि 200 किलोमीटर पैदल चलने के बाद भी उनकी बात नहीं सुनी गई, तो वे अब पीछे हटने वाले नहीं हैं।

पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और अनुत्तरित सवाल

सिमली में 200 बेड का बेस अस्पताल बनने से केवल कर्णप्रयाग या गैरसैंण ही नहीं, बल्कि चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी जिले के दर्जनों सीमांत गांवों को सीधा फायदा मिलेगा। वर्तमान में आपातकालीन स्थितियों या गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पहाड़ों के मरीजों को ऋषिकेश, देहरादून या श्रीनगर (गढ़वाल) के चक्कर काटने पड़ते हैं। समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि 200 किलोमीटर पैदल चलकर देहरादून और फिर गैरसैंण की सड़कों पर आवाज बुलंद कर रहे इन ग्रामीणों की मांग पर सरकार कब ठोस कदम उठाएगी? क्या सिमली बेस अस्पताल केवल कागजी घोषणा बनकर रह जाएगा या धरातल पर इसका निर्माण शुरू होगा? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं होता, उनका यह आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।

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