उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों ने अपनी पुरानी और एक बड़ी मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राज्य कर्मचारियों को सेवा के 10, 16 और 26 साल पूरे होने पर पहले की तरह तीन पदोन्नत वेतनमान (एसीपी) का लाभ दोबारा दिए जाने की मांग को लेकर आज सचिवालय परिसर में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तराखंड और उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बड़े पदाधिकारी शामिल हुए। सभी ने मिलकर एक मंच पर आने का फैसला किया और ‘एसीपी (प्रोन्नत वेतनमान) बहाली संयुक्त मोर्चा, उत्तराखंड’ के गठन का औपचारिक ऐलान कर दिया।
पहले 10, 16, 26 साल की सेवा पर तीन पदोन्नत वेतनमान मिलते थे।
बैठक में वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि राज्य कर्मचारियों को पहले 10, 16 और 26 साल की सेवा पूरी होने पर तीन पदोन्नत वेतनमान मिलते थे। लेकिन 1 जनवरी 2017 से सरकार ने एमएसीपी (MACP) व्यवस्था लागू कर दी, जिसके बाद पुरानी व्यवस्था बंद हो गई। नई व्यवस्था में अब कर्मचारियों को 10, 20 और 30 साल की सेवा पर अगला ग्रेड वेतन मिलता है। कर्मचारियों का कहना है कि इस बदलाव से उन लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है जिन्हें पूरी नौकरी के दौरान प्रमोशन (पदोन्नति) के मौके बहुत कम मिलते हैं।
ऐसे हजारों कर्मचारी जिन्हें सेवाकाल में सिर्फ एक या दो ही प्रमोशन
बैठक में इस बात पर भी खास जोर दिया गया कि प्रदेश के कई विभागों में ऐसे हजारों कर्मचारी हैं जिन्हें सेवाकाल में सिर्फ एक या दो बार ही प्रमोशन मिल पाता है। यहाँ तक कि कई कर्मचारी बिना किसी प्रमोशन के ही रिटायर हो जाते हैं। इन कर्मचारियों में न्याय पंचायत, विकासखंड, खंड स्तर के साथ-साथ तकनीकी संवर्ग के लोग भी शामिल हैं। इन सभी का मानना है कि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रखने और उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए पुरानी एसीपी व्यवस्था का बहाल होना बेहद जरूरी है।
नई रणनीति के तहत तय किया गया है कि इस मोर्चे के जरिए प्रदेशभर के सभी कर्मचारी संगठनों को एक साथ लाया जाएगा। इसी सिलसिले में कल यानी 5 नवंबर को कर्मचारी नेता मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री को मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा जाएगा और उनसे अनुरोध किया जाएगा कि वे पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करें।
मांग न मानी तो 27 नवंबर को सचिवालय कूच
साथ ही, बैठक में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर सरकार या शासन स्तर पर बातचीत के बाद भी उनकी मांग पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया जाता है, तो कर्मचारी कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 27 नवंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड से सचिवालय तक एक विशाल रैली निकाली जाएगी और सचिवालय का घेराव किया जाएगा। उसी दिन रैली के बाद आगे के आंदोलन की उग्र रणनीति की घोषणा भी कर दी जाएगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष अरुण पांडे और उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष आर.सी. शर्मा , प्रदेश प्रवक्ता हर्ष जोशी और सी.डी. सैनी समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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