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Saturday, February 7, 2026
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धार्मिक आस्था है, लेकिन ज़िंदगी भी तो कुछ कम नहीं

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चारधाम यात्रा: श्रद्धा के साथ-साथ ज़िंदगी की तैयारी भी जरूरी है

देहरादून: उत्तराखंड के चारधाम केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री एक बार फिर देशभर के श्रद्धालुओं से गुलजार हैं। लेकिन इस गुलजारगी के बीच, एक चुप्पी भी है, मौत की चुप्पी।
आप सोचिए, 30 अप्रैल 2025 को यात्रा शुरू हुई और अभी महज़ 27 दिन ही हुए हैं। लेकिन 37 ज़िंदगियाँ इस यात्रा पर कहीं खो गईं। जिनमें से 18 मौतें सिर्फ केदारनाथ में हुईं, 10 यमुनोत्री में, 7 गंगोत्री में और 2 बदरीनाथ में। ये आकड़े हेलीकॉप्टर क्रैश को छोड़कर हैं।
इनमें लगभग सभी की उम्र 50 साल से अधिक है। मौत की वजह? ज़्यादातर मामलों में हृदय गति रुकना या सांस की तकलीफ।
अब ज़रा सोचिए हेमकुंड साहिब, जो कि 4,329 मीटर की ऊंचाई पर है, वहाँ मौतें नहीं होतीं। लेह-लद्दाख, जिसकी ऊंचाई 3,500 मीटर से भी ऊपर है, वहाँ लोग महीनों रहते हैं। लेकिन केदारनाथ जो 3,584 मीटर पर है, वहाँ हर साल मौतों की खबर आती है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. केके त्रिपाठी कहते हैं कि लोग अपने शरीर की नहीं सुनते, बस मन की सुनते हैं। सांस फूलती है, थकान होती है, सीने में दर्द रहता है फिर भी चढ़ाई करते हैं। सोचते हैं भगवान सब ठीक कर देंगे। लेकिन भगवान ने शरीर को संकेत देने की भी शक्ति दी है।
पर्वतारोही शीतल राज साफ कहती हैं कि एक पर्वतारोही भी 3000 मीटर की चढ़ाई से पहले महीनों तैयारी करता है। लेकिन लोग गाड़ी उठाते हैं और सोचते हैं कि सीधा धाम पहुंच जाएंगे। ये नहीं जानते कि पहाड़ चढ़ना शरीर पर बोझ डालना है।
सरकार की तरफ से रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, प्रशासन सब लगे हुए हैं। लेकिन क्या यह व्यवस्था उन लोगों को भी रोक पाती है, जिनका शरीर कहता है’ रुको’ ? नहीं। कई श्रद्धालु तो 12 घंटे की गाड़ी यात्रा के बाद सीधे चढ़ाई शुरू कर देते हैं। बिना आराम, बिना जांच, बिना तैयारी के।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि आप सांस की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, या दिल की तकलीफ से जूझ रहे हैं तो इस यात्रा से पहले महीनों की तैयारी करें। कुल मिलाकर श्रद्धा, सबसे महान होती है। लेकिन ज़िंदगी उससे कम नहीं। चारधाम यात्रा नवंबर तक चलेगी। आप जाइए लेकिन खुद की सुने बिना न जाइए।
वही सरकार को चाहिए कि श्रद्धा पर सवाल नहीं, सुरक्षा पर काम करे।
यात्रा पर जाने वाले बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जाए। पैदल मार्ग पर स्वास्थ्य केंद्र और विश्राम स्थल बढ़ाए जाएं।
क्योंकि श्रद्धा का मूल्य जीवन है और यह जीवन अगर ख़तरे में है, तो यात्रा की पूर्णता अधूरी है।

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