उत्तराखंड का एक ऐसा मंदिर, जो समुद्र तल से पूरे 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। एक ऐसा धाम जो साल के 364 दिन पूरी तरह बंद रहता है। जहां पूजा तो दूर आम दिनों में जाना भी नामुमकिन माना जाता है। लेकिन रक्षाबंधन के पावन पर्व पर यहां एक ऐसा चमत्कार होता है जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाए।
उत्तराखंड का वशीनारायण मंदिर
दरअसल हम बात कर रहे है वशीनारायण मंदिर की। एक ऐसा मंदिर, जिसके कपाट साल के 364 दिन लोहे के भारी तालों में बंद रहते हैं। पूरे साल यहां न तो कोई घंटी बजती है, न कोई शंख गूंजता है और न ही कोई भक्त कदम रखता है।

सिर्फ रक्षाबंधन पर खुलते है कपाट
लेकिन जैसे ही रक्षाबंधन की सुबह होती है, इस मंदिर में हलचल होना शुरू हो जाती है बंद कपाट खोले जाते हैं। उत्तराखंड की महिलाएं 12 हजार फीट ऊंचे पहाड़ पर चढ़कर इस मंदिर तक पहुंचती हैं। सिर्फ अपने बड़े भारी को राखी बांधने के लिए।
भगवान विष्णु को महिलाए बांधती है राखी
आप ये सुनकर हैरान रह जाएंगी कि इन बहनों का भाई कोई साधारण पुरूष नहीं है बल्कि सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु हैं।
रक्षाबंधन के दिन सभी महिलाएं यहां आकर भगवान विष्णु की कलाई पर राखी बांधती हैं। साथ ही उनके अपने परिवार, अपने भाइयों और पूरे गांव की खुशहाली और सुरक्षा की मनौती मांगती हैं। फिर शाम होते ही कपाटों पर दोबारा ताला लगा दिया जाता है।

मंदिर का पाताल लोक से है गहरा कनेक्शन
अब आप सोच रहे होंगे की आखिर ऐसा क्यों किया जाता है। आखिर क्यों ये मंदिर सिर्फ रक्षाबंधन पर ही खुलता है। तो आपको बता दें कि इसके सीधे तार पाताल लोक से जुड़े हुए हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक वक्त था जब दानवीर राजा बलि के घमंड से तीनों लोक कांप उठे थे। देवताओं में हाहाकार मच गया।
तब देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। राजा बलि का सारा घमंड चूर-चूर कर दिया। इसके बाद राजा बलि ने पाताल लोक में जाकर विष्णु भगवान की कठोर तपस्या की। प्रसन्न होकर भगवान उसे अपने सामने रहने का वचन देते हैं। इस पर पाताल लोक में भगवान नारायण राजा बलि के द्वारपाल बन जाते हैं।
मां लक्ष्मी राजा बलि के हाथ पर बांधती है रक्षा सूत्र
तब पति को मुक्त करने के लिए माता लक्ष्मी पाताल लोक जाकर राजा बलि के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधती हैं। साथ ही भगवान विष्णु को द्वारपाल से मुक्त करने का वचन मांगती हैं। तब राजा बलि उन्हें द्वारपाल से मुक्त कर देते हैं।
कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु वापस लौटे, तो इसी उर्गम घाटी में रक्षाबंधन के दिन वो पाताल से धरती पर प्रकट हुए। जहां उनका उनका खास पूजन किया गया।
रक्षाबंधन के बाद फिर लग जाता है ताला
इसी पौराणिक कथा और परंपरा को जीवंत रखते हुए आज भी उर्गम घाटी की बेटियां भगवान विष्णु को अपना रक्षक और भाई मानकर राखी बांधने 12 हजार फीट की चढ़ाई चढ़ती हैं। रक्षाबंधन के बाद एक बार फिर भारी ताला मंदिर के मुख्य द्वार पर जड़ दिया जाता है। और वंशीनारायण मंदिर, फिर से 364 दिनों के लंबे सन्नाटे में डूब जाता है। अगले साल रक्षाबंधन तक के लिए।








