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Saturday, March 28, 2026
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हिंदुत्त्व विश्व कल्याण का मार्ग* *हिंदुत्व की विशेषता मानव एकता(जोड़ने का सूत्र)ओर विश्व कल्याण की **आज का भारत परम शक्ति की ओर बढ़ता हुआभारत

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**लोकमाता अहिल्याबाई ने जो मंदिर उत्थान के कार्य आरम्भ किए, वह आज की युवा पीढ़ी की मंदिर उत्थान की संकल्पना का आधार हैं।**

दून विश्वविद्यालय ,देहरादूनके सभागार में मंगलवार को अहिल्याबाई होलकर त्रिशताब्दी समारोह आयोजित किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि **लोकमाता अहिल्या बाई होलकर की शासन व्यवस्था प्रेरणा दायक थी।**
अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रदीप जोशी ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई ने जो मंदिर उत्थान के कार्य आरम्भ किए, वह आज की युवा पीढ़ी की मंदिर उत्थान की संकल्पना का आधार हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत परम शक्ति की ओर बढ़ता हुआ भारत है। लोकमाता अहिल्या बाई होलकर का तीन शताब्दियों पूर्व की लोक कल्याण कारी शासन व्यवस्था, न्यायप्रियता, उदार और सरल कर प्रणाली, सनातन धर्म के प्रति श्रद्धा, राष्ट्र की एकता, समानता, रणक्षेत्र का शौर्य, शिक्षा, महिलाओं को सम्मान और अधिकार आज भी प्रासंगिक और आदर्श बन कर मार्ग दिखा रहें हैं।
उन्होंने कहा कि अहिल्या बाई के जीवन कार्य का प्रभाव प्रत्येक भारत के नागरिक का हर कालखंड का गौरव है। जो विलास और सुख सुविधाओं से भरपूर महलों का सुख भोग सकती थी। लेकिन उनका जीवन अपनी प्रजा के कल्याण को समर्पित आलौकिक सन्त का जीवन रहा। उन्होंने कहा कि कानून का राज तभी स्थापित होता है जब कानून के सामने सब बराबर हों।
कार्यक्रम में लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल द्वारा लिखित पुस्तक प्रात: स्मरणीय अहिल्या बाई का विमोचन हुआ। कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र खंडूरी ने किया। कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक डॉ शैलेन्द्र, सह प्रान्त प्रचारक चन्द्रशेखर, प्रांत प्रचार प्रमुख संजय, चंद्रगुप्त विक्रम,कैलाश महलाना समेत छात्र, शिक्षक, सामाजिक संगठनों के प्रमुख, साहित्यकार, लेखक आदि मौजूद थे।

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