एक तीर से कई निशानेः संगठन की तल्खी और ईडी की धमक दिल्ली में ‘तीर्थ’ नहा गए हरीश रावत!

उत्तराखंड कांग्रेस का सियासी पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। बात चाहे पार्टी के भीतर की खींचतान की हो या फिर हाईकमान की दिल्ली दरबार में घेराबंदी की, पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश रावत एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में आ गए हैं। प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक कार्यक्रमों के समांतर अपने निजी कार्यक्रम चलाने को लेकर जब प्रभारी की ओर से तल्ख चिट्ठी आई, तो रावत ने एकाएक अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और दिल्ली की ओर रुख कर लिया।

हालांकि, दिल्ली पहुंचते ही उनकी उम्मीदों पर तब पानी फिर गया जब राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा से उनकी तुरंत मुलाकात नहीं हो सकी। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि रावत को संगठन के भीतर किनारे करने की कोशिश की जा रही है।

हरीश रावत ने एक तीर से साधे कई निशाने

लेकिन राजनीति के चतुर खिलाड़ी हरीश रावत इतनी आसानी से हथियार डालने वाले कहां थे! आखिरकार दिल्ली में उनका इंतजार खत्म हुआ और कुमारी शैलजा के साथ उनकी अहम बैठक संपन्न हो गई। इस मुलाकात ने पिछले कुछ दिनों से चल रहे कयासों के दौर पर फिलहाल विराम लगा दिया है। मुलाकात के बाद रावत ने अपने दिल का हाल बयां करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक और राजनीतिक रूप से सोची-समझी पोस्ट साझा की।

हरदा ने शैलजा से की मुलाकात

रावत ने लिखा, “आज मेरी कुमारी शैलजा जी से मुलाकात हो गई है। बहुत सारे विषयों और मामलों में उनसे सकारात्मक बातचीत हुई। हम सभी का एक ही अंतिम लक्ष्य है,पार्टी को धरातल पर मजबूत करना और 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों में राज्य में सत्ता परिवर्तन लाना।” हालांकि, संगठन को कड़ा संदेश देते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने लिखा, “एक बात दिन के उजाले की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि उत्तराखंड और यहां के आम लोगों के सामने समय-समय पर जो भी चुनौतियां आएंगी, हरीश रावत उनके समाधान के लिए अपनी आवाज लगातार उठाता रहेगा।”

पार्टी के भीतर अपनी अहमियत का करवाया अहसास

पार्टी के भीतर अपनी अहमियत का अहसास कराते हुए रावत ने जनता के प्रति आभार जताया और कहा कि उन्हें हर कदम पर जनता का व्यापक समर्थन मिला है, जो आगे भी जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने आलाकमान के पाले में गेंद डालते हुए उम्मीद जताई कि राहुल गांधी द्वारा लोकतंत्र बचाने की चलाई जा रही बड़ी मुहिम में राज्य स्तर पर पार्टी उनकी सेवाओं का समुचित उपयोग करेगी।

मुलाकात से पहले हरीश रावत ने खेला एक और दांव

इस मुलाकात से ठीक पहले हरीश रावत ने एक और दांव खेलकर अपनी दिल्ली मौजूदगी का राजनीतिक औचित्य साबित करने की कोशिश की थी। उन्होंने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन के दिल्ली प्रदर्शन का समर्थन करते हुए लिखा था कि वह भी 12 अक्टूबर के इस बड़े जनांदोलन का हिस्सा बनेंगे।

जन आंदोलन में शामिल होकर “एक तीर्थ और नहाएंगे”

दिलचस्प बात यह रही कि रावत को 11 अक्टूबर को वापस उत्तराखंड लौटना था, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे कुछ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे। लेकिन राजनीति के उस्ताद रावत ने कानूनी झंझटों और राजनीतिक व्यस्तताओं के बीच संतुलन बनाते हुए कहा कि अब वह दिल्ली में रुककर 12 अक्टूबर के जन आंदोलन में शामिल होकर “एक तीर्थ और नहाएंगे।”

हरीश रावत के इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि भले ही संगठन की चिट्ठियों ने उनके कदमों पर ब्रेक लगाने की कोशिश की हो, लेकिन वह हर मोड़ से अपने लिए एक नया सियासी रास्ता निकालना बखूबी जानते हैं।

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