उत्तराखंड में आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के लंबे संघर्ष, अटूट एकजुटता और उनके नुमाइंदों की अथक मेहनत आखिरकार रंग लाती नजर आ रही है। राज्य के श्रमजीवी और आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने एक ठोस और निर्णायक दिशा में कदम बढ़ाया है।
जिस पर अब शासन स्तर से भी बेहद सकारात्मक आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। इस खबर के सामने आने से प्रदेशभर के हजारों आउटसोर्स कर्मियों में एक नई उम्मीद और उत्साह की लहर दौड़ गई है।
पिछले महीने परेड ग्राउंड में किया था धरना-प्रदर्शन
याद दिला दें कि पिछले महीने 6-7 अक्टूबर, 2026 को संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के बैनर तले प्रदेशभर के कर्मचारियों ने देहरादून के परेड ग्राउंड में एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया था।
इस आंदोलन की गूंज शासन के गलियारों तक पहुंची, जिसके परिणामस्वरूप उच्च स्तर से प्राप्त निर्देशों के क्रम में शासन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उक्त कर्मचारी संगठन के साथ सकारात्मक माहौल में आधिकारिक वार्ता की गई थी। इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान कर्मचारियों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
ये मांगें शासन के सामने रखी
वार्ता के दौरान संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्य रूप से दो प्रमुख और बेहद जायज मांगें शासन के सामने मजबूती के साथ रखी थीं:-
- समान कार्य समान वेतन व नियमितीकरण: आउटसोर्स कर्मचारियों को उपनल (UPNL) के कर्मचारियों की तर्ज पर “समान कार्य समान वेतन”, नियमितीकरण और समान सेवा नियमावली का लाभ प्रदान किया जाए।
- सेवा समाप्ति पर रोक और बहाली: विभिन्न विभागों में कार्यरत किसी भी आउटसोर्स कर्मचारी की बिना किसी ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई के अचानक सेवा समाप्त न की जाए, तथा जिन कर्मचारियों की सेवाएं पूर्व में समाप्त कर दी गई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस बहाल किया जाए।
प्रदेश में कार्यरत हैं लगभग 11,267 आउटसोर्स कर्मी
वार्ता के दौरान संगठन को एक माह का समय डेटा जुटाने के लिए दिया गया था, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वर्तमान में पूरे प्रदेश के विभिन्न विभागों में कुल कितने आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं और कितनों को उनके पदों से हटाया गया है।
संघ के प्रतिनिधिमंडल ने तत्परता दिखाते हुए शासन से दोबारा वार्ता की और स्पष्ट वस्तुस्थिति का डेटा प्रस्तुत किया:-
• प्रदेशभर के विभिन्न विभागों में वर्तमान समय में लगभग 11,267 आउटसोर्स कर्मचारी पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
• विभिन्न कारणों या मनमाने तरीके से अब तक सेवा से हटाए गए कर्मचारियों की संख्या लगभग 309 है।
• संगठन ने पुरजोर मांग की है कि भविष्य में किसी भी कर्मचारी की सेवा बिना उचित कारण के और अचानक समाप्त न की जाए।
शासन स्तर से सकारात्मक आदेश और नीतिगत बैठक की तैयारी
कर्मचारियों की इन न्यायसंगत मांगों और संगठन द्वारा प्रस्तुत किए गए वास्तविक आंकड़ों को गंभीरता से लेते हुए, शासन स्तर पर सचिव, माननीय मुख्यमंत्री (उत्तराखंड शासन) विनय शंकर पाण्डेय द्वारा मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन को पत्र प्रेषित कर दिया गया है।
शासन का मानना है कि संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के इन प्रकरणों और मांगों के नीतिगत और स्थायी निस्तारण के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित किया जाना नितांत आवश्यक है। इस संबंध में शासन द्वारा उचित और समुचित दिशा-निर्देश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर है।
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