
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि माना कि अर्थ भी महत्वपूर्ण है इसके साथ ही सभी क्षेत्रों में प्रगति भी जरूरी है। लेकिन भारत सही मायने में विश्व गुरु तब माना जाएगा जब देश अध्यात्म की और आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा, “अध्यात्म और धर्म में यह वृद्धि तब होगी जब हम न केवल त्योहार मनाएंगे और अपनी पूजा पद्धति से काम करेंगे, बल्कि हमारा जीवन भी भगवान शिव की तरह इतना निर्भय हो जाएगा कि हम अपने गले में सांप भी धारण कर सकें। हमारे पास जो गुण, शक्ति और बुद्धि है उसका उपयोग दूसरों के लाभ के लिए किया जाना चाहिए।”

भागवत ने कहा, ‘‘हमारे अंदर जो भी अच्छाई है, उसे हमें सबके साथ बांटना चाहिए। बुराई कुछ हद तक मौजूद है, लेकिन उसे रोका जाना चाहिए और उसे फैलने नहीं देना चाहिए। हमें नकारात्मकता को कभी दूसरों को नहीं देना चाहिए। बल्कि, उसे अपने भीतर समेटकर उसे खत्म करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, अच्छाई को बांटनी चाहिए। हमें इसी तरह जीना चाहिए ताकि यह हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों से जोड़े।

