रूस में 97 दिनों तक नरक देखा!, ऐसे लौटे उत्तराखंड के दो लाल, वतन वापसी की इमोशनल कहानी – Khabar Uttarakhand

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रूस में पिछले 97 दिनों से बंधक बने धारचूला के दो सगे भाई आनंद और भूपेंद्र आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। ये खबर सिर्फ दो लोगों की वतन वापसी की ही नहीं बल्कि एक गर्भवती पत्नी के संघर्ष और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कूटनीतिक प्रयासों की बड़ी जीत है। नौकरी के नाम पर आठ लाख की ठगी और रूस में पासपोर्ट छीनकर बंधक बनाए जाने की ये पूरी कहानी आपके भी रोंगटे खड़े कर देगी।

रूस के नरक में थे उत्तराखंड के आनंद और भूपेंद्र

दरअसल उत्तराखंड के धारचूला के रहने वाले आनंद और भूपेंद्र करीब तीन महीने बाद जब अपने घर की दहलीज पर पहुंचे तो सबकी आंखें नम हो गईं। लेकिन इस खुशी के पीछे है 97 दिनों की वो खौफनाक दास्तां, जिसे ये दोनों भाई शायद ही कभी भूल पाएं।

रूस में 70 से 80 हजार रुपये की नौकरी का झांसा

सब कुछ शुरू हुआ इसी साल अप्रैल में ऊधम सिंह नगर के सितारगंज के एक एजेंट ने आनंद और भूपेंद्र को रूस में 70 से 80 हजार रुपये महीने की नौकरी का झांसा दिया। लिहाजा गरीबी से लड़ने के लिए परिवार ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। सोने के गहने बेचे गए, भारी ब्याज पर कर्ज लिया गया और 8 लाख रुपये एजेंट की झोली में डाल दिए गए। लेकिन 6 मई को जब दोनों मॉस्को पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

मॉस्को पहुंचते ही दोनों का पासपोर्ट और वीजा छीना

मॉस्को पहुंचते ही दोनों भाइयों के पासपोर्ट और वीजा छीन लिए गए। उन्हें न तो तय काम दिया गया और न ही सैलरी, उनसे जबरन हाउसकीपिंग का काम कराया गया। हालात इतने बदतर थे कि आनंद और भूपेंद्र को ठीक से खाना तक नसीब नहीं होता था। जून के महीने में जब भाइयों ने घर लौटने की जिद की तो उन्हें किसी अनजान जगह पर ले जाकर बंधक बना दिया गया। करीब 20 दिनों तक घरवालों का उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ।

पिथौरागढ़ में 9 महीने गर्भवती पत्नी ने नहीं मानी हार

लेकिन इस दौरान पिथौरागढ़ में भूपेंद्र की 9 महीने की गर्भवती पत्नी तनुजा कार्की ने हार नहीं मानी। अपनी पति और जेठ की सलामती की दुआ मांगते हुए, तनुजा कार्की अधिकारियों के दरवाजे खटखटाती रहीं। तनुजा कार्की ने पिथौरागढ़ के डीएम आशीष भटगांई से भी मदद की गुहार लगाई। जिसके बाद सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी को फोन कर पूरे मामले के बारे में बताया गया। मामला जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा तो सरकार तुरंत हरकत में आई।

CM धामी ने इस मामले पर की कार्रवाई

CM धामी ने खुद विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया। कूटनीतिक दबाव काम आया और आखिरकार आनंद और भूपेंद्र को उस नर्क से आजाद करा लिया गया। घर लौटने के बाद सीएम धामी ने वीडियो कॉल पर दोनों का हाल जाना और उस ठग एजेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा भी दिया है।