नैनी डांडा में हाल ही में एक 55 वर्षीय महिला मंजू देवी को गंभीर रूप से घायल करने और उसके बाद उनकी मौत हो जाने की घटना सामने आई थी। इसी को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने जिम्मेदार भालू को वन विभाग द्वारा मारे जाने के आदेश दिए जाने की मांग की है।
नैनी डांडा में भालू का आतंक!
दरअसल धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि इस भालू की वजह से नैनी डांडा के ढगल गांव और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोग अपने घरों से निकलने से डरने लगे हैं और वन विभाग है कि एक दो जगले लगाकर अपने कर्तव्यों की ईतिश्री मान रहे है।
कांग्रेस ने की गोली मारने की मांग
धीरेंद्र प्रताप ने वन मंत्री सुबोध उनियाल से मांग की है कि वो वहां पर अच्छे शुटरो का एक दल तत्काल भेजें और इस बात के आदेश दिया जाए कि इस भालू को मार दिया जाए ताकि यहां के लोगों के जीवन पर जो खतरा मंडरा रहा है उसका दूर किया जा सके।
भालू बंदर बाघ गुलदार के निर्बाध घूमने से लोगों का जीवन खतरे में
उन्होंने कहा कि ये बड़ा दुर्भाग्य का विषय है कि राज्य के विभिन्न अंचलों में जहां अपराधी मातृशक्ति की जान के पीछे पड़े हैं और उत्तराखंड भारत के तमाम राज्यों में महिला अपराध पर पहले नंबर पर आ गया है। वहीं भालू बंदर बाघ गुलदार और तमाम अन्य जानवरों के निर्बाध घूमने से लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया है।
25 लाख रुपए प्रति व्यक्ति मुआवजा देने की भी मांग
उन्होंने वन घटनाओं में मारे गए लोगों के परिजनों को कम से कम 25 लाख रुपए प्रति व्यक्ति मुआवजा दिए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा 10 लाख की राशि बिल्कुल पर्याप्त है और इसके अलावा जिस परिवार के व्यक्ति की मृत्यु होती है सरकार को चाहिए कि उसके परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देने का भी प्रावधान करें।
उत्तराखंड में मातृशक्ति का अपमान हो रहा
उन्होंने कहा भारत के किसी राज्य से इस तरह की खबरें नहीं आती जिस तरह से उत्तराखंड में मातृशक्ति का अपमान हो रहा है । अंकिता भंडारी के अपराधियों को सजा नहीं मिल रही और इसी तरह से जंगली जानवर लोगों का आम जीवन अजीज कर चुके हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
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