CJI सूर्यकांत का NLSIU में बयान, बोले- ‘कुछ बाहरी ताकतों ने खड़ी की थीं बाधाएं’

नई दिल्ली

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों से न्याय, स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की. उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में केवल कानून की जानकारी होना काफी नहीं है, बल्कि न्याय के पक्ष में खड़े होने का साहस और दूसरों की बात सुनने की विनम्रता भी जरूरी है। 

बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने अपने दौरे को लेकर हुए विरोध पर प्रतिक्रिया भी दी. उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी ताकतों के कारण पैदा हुई परिस्थितियों से कार्यक्रम के आयोजन को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी. हालांकि, छात्रों ने बाधाओं से ऊपर उठकर खुले संवाद और विचारों की अभिव्यक्ति का समर्थन किया। 

'कुछ बाहरी ताकतों ने पैदा की अनिश्चितता'

सीजेआई सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा, 'जैसा कि हम सभी जानते हैं, इस समारोह से पहले के दिन पूरी तरह चुनौतियों से मुक्त नहीं थे. कुछ बाहरी ताकतों के कारण पैदा हुई अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों ने अनिश्चितता का माहौल बना दिया था. कुछ समय के लिए ऐसा लगने लगा था कि शायद यह समारोह उस तरह आयोजित नहीं हो पाएगा, जैसी हमने उम्मीद की थी। 

उन्होंने आगे कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद छात्रों ने अपने दृढ़ संकल्प का परिचय दिया और कार्यक्रम के आयोजन में आने वाली बाधाओं से ऊपर उठकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। 

'दमन की कायरता के बजाय खुले संवाद को चुना'
छात्रों को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, 'यहां मौजूद प्रतिभाशाली छात्रों के इस विशाल समूह ने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प की भावना को इतनी आसानी से दबाया नहीं जा सकता. बाधाएं पैदा करने वाली आवाजों से ऊपर उठकर आपने दमन की कायरतापूर्ण प्रवृत्ति के बजाय खुले संवाद की गरिमा को बनाए रखने का रास्ता चुना। 

सीजेआई ने कहा, 'आपने छल और धोखे का पर्दा हटाकर यह दिखा दिया है कि ईमानदार बहुमत की इच्छाशक्ति कुछ बेईमान लोगों की साजिशों पर भारी पड़ सकती है। 

'ईमानदारी से बनेगी आपकी पेशेवर प्रतिष्ठा'
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ईमानदारी के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ही भविष्य में उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को मजबूत बनाएगी. छात्रों को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा, 'मैं आपको केवल बधाई देने के लिए नहीं, बल्कि आपसे बहुत सारी उम्मीदें लेकर भी संबोधित कर रहा हूं। 

'कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं'
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी पेशे में सफलता के लिए केवल कानून की धाराओं और पुराने अदालती फैसलों की जानकारी काफी नहीं है. इसके लिए न्याय की रक्षा करने का साहस और उन लोगों की बात सुनने की विनम्रता भी होनी चाहिए, जिनकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है। 

उन्होंने कहा, 'कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है. इसमें केवल कानून और न्यायिक मिसालों पर महारत हासिल करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि जो न्यायसंगत है, उसके पक्ष में खड़े होने का साहस और अक्सर अनसुनी रह जाने वाली आवाजों को सुनने की विनम्रता भी जरूरी है। 

'सुविधा के लिए सिद्धांतों से समझौता न करें'
सीजेआई ने छात्रों को आगाह किया कि वे अपने पेशेवर जीवन में सुविधा के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता न करें और सफलता हासिल करने के लिए किसी तरह का शॉर्टकट अपनाने से बचें. उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने संस्थान में सीखे गए मूल्यों और आदर्शों को हमेशा याद रखना चाहिए. कानूनी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आपराधिक या संवैधानिक कानून के सिद्धांतों को समझने से कहीं आगे है. इसमें उन लोगों के विचारों और अनुभवों को समझना भी शामिल है, जो दुनिया को हमसे अलग नजरिए से देखते है। 

'देश को आपसे बड़ी उम्मीदें हैं'
चीफ जस्टिस ने कहा कि कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को अन्याय दूर करने, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान के मूल्यों को बनाए रखने से संतुष्टि मिल सकती है. उन्होंने छात्रों से कहा कि देश उनसे केवल वकील या कानूनी पेशेवर बनने की उम्मीद नहीं करता, बल्कि समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी निभाने की भी अपेक्षा रखता है। 

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'जब आप इस संस्थान से निकलकर दुनिया में कदम रखें, तो यह याद रखें कि देश आपको केवल कानून के पेशेवरों के रूप में नहीं, बल्कि उम्मीद के संदेशवाहकों के रूप में देखता है। 

 

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