उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों अचानक हलचल और आक्रामक तेवर देखने को मिल रहे हैं। गुरुवार को अंकिता भंडारी मामले को लेकर कांग्रेस ने देहरादून में राजभवन के बाहर अचानक गुरिल्ला प्रदर्शन कर दिया। पुलिस-प्रशासन को भनक तक नहीं लगी और कांग्रेसी के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता सीधे राजभवन के मुख्य द्वार तक पहुंच गए। इस सरप्राइज ‘गुरिल्ला प्रदर्शन’ ने राज्य की खुफिया एजेंसियों यानी इंटेलिजेंस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस की यह रणनीति कोई इत्तेफाक
सियासी गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस की यह रणनीति कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह वही राष्ट्रीय मॉडल है जिसे राहुल गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में बार-बार आजमाया जा चुका है। हाल ही में राहुल गांधी का अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचकर धरना देना और फिर दिल्ली में अंकिता भंडारी के परिजनों से अचानक मुलाकात कर रात में ही इंडिया गेट पर धरने में शामिल होना इसी आक्रामक रणनीति की कड़ी है। लगता है अब दिल्ली वाली यह ‘गुरिल्ला पॉलिटिक्स’ सीधे देहरादून की आबोहवा में रच-बस गई है।
राहुल गांधी का अचानक घेराबंदी का मॉडल
कांग्रेस की इस नई कार्यशैली को समझने के लिए दिल्ली के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर नज़र डालना ज़रूरी है। बीते दिनों राहुल गांधी किसी अन्य पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का बहाना बनाकर निकले और सुरक्षा तंत्र को चकमा देते हुए सीधे लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंच गए। जब तक सुरक्षा एजेंसियों को भनक लगी, तब तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अचानक विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुका था। सुरक्षा बल मुस्तैद हुए और राहुल गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में लेना पड़ा, लेकिन तब तक कांग्रेस संदेश देने में कामयाब हो चुकी थी। बुधवर रात ही अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘VIP’ एंगल को लेकर उठे नए विवाद के बीच, जब अंकिता के माता-पिता दिल्ली पहुंचे, तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने बीती रात अचानक इंडिया गेट पर उनके विरोध स्थल पर पहुंचकर धरना दिया। बिना किसी शोर-शराबे या पूर्व सूचना के देर रात हुए इस घटनाक्रम से पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुबह 4 बजे पुलिस को कार्रवाई कर प्रदर्शनकारियों को हटाना पड़ा।
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दून में उतरा दिल्ली का ‘सरप्राइज अटैक’ फॉर्मूला
दिल्ली के इन्हीं घटनाक्रमों की तर्ज पर देहरादून में भी कांग्रेस ने अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच और निष्पक्षता की मांग को लेकर राजभवन का अचानक घेराव कर दिया। पहले जहां राजनीतिक दल बड़ी रैलियों और हफ्तों पहले से पुलिस परमिशन के साथ प्रदर्शन करते थे, वहीं अब ‘सरप्राइज अटैक’ वाली रणनीति अपनाई जा रही है। अंकिता भंडारी का मुद्दा उत्तराखंड के हर नागरिक के दिल से जुड़ा मुद्दा है, और राहुल गांधी द्वारा दिल्ली में इस मुद्दे को उठाने के तुरंत बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने भी राजधानी देहरादून में वही तेवर दिखाकर सरकार पर चौतरफा दबाव बना दिया है।
उत्तराखंड में पहले कब-कब दिखे ऐसे तेवर?
उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में अचानक होने वाले आंदोलन और ‘गुरिल्ला स्टाइल’ प्रदर्शनों का पुराना नाता रहा है, हालांकि पहले वे अक्सर क्षेत्रीय आंदोलनों में दिखते थे। लेकिन मुख्यधारा की राजनीति में इस तरह के तेवर हाल के वर्षों में ज्यादा देखने को मिले हैं: जब भी गैरसैंण के बजाय देहरादून में विधानसभा सत्र बुलाया गया या भर्ती घोटालों का मुद्दा उठा, विपक्षी दलों व छात्र संगठनों ने बिना सूचना के अचानक सचिवालय और राजभवन की ओर कूच किया। मुख्य रास्तों के बजाय तंग गलियों से निकलकर अचानक बैरिकेड्स पर पहुंच जाना इस रणनीति का मुख्य हिस्सा रहा है। पेपर लीक मामलों के दौरान देहरादून के गांधी पार्क से लेकर एस्लेहॉल चौक तक युवाओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस को चकमा देकर अचानक सड़कें जाम कर दी थीं। हाल के महीनों में जब-जब दिल्ली में राहुल गांधी या केंद्रीय नेतृत्व पर पुलिसिया कार्रवाई या गिरफ्तारी हुई, देहरादून में कार्यकर्ताओं ने तुरंत बिना किसी पूर्व सूचना के लोक भवन और राजभवन कूच कर पुलिस प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए।
इंटेलिजेंस फेलियर और सरकार की चिंता
राजभवन के बाहर अचानक हुए इस प्रदर्शन से खुफिया विभाग और राज्य पुलिस प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। जब दिल्ली में पीएम आवास और इंडिया गेट जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में अचानक प्रदर्शन हो सकते हैं, तो देहरादून जैसी संवेदनशील राजधानी में सुरक्षा चूक होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह ‘गुरिल्ला रणनीति’ सरकार को लगातार डिफेंसिव मोड में रखने की कोशिश है। जब पुलिस को पूर्व सूचना नहीं होगी, तो वाटर कैनन या लाठीचार्ज जैसे इंतजामों का समय नहीं मिलेगा और विपक्षी कार्यकर्ताओं का आक्रामक रुख मीडिया तथा जनता का ध्यान तुरंत खींच लेगा।
कांग्रेस को मिला नया ‘पॉलिटिकल टूल’
संक्षेप में समझें तो, दिल्ली में राहुल गांधी के पीएम आवास व इंडिया गेट प्रदर्शनों ने उत्तराखंड कांग्रेस को भी एक नया ‘पॉलिटिकल टूल’ दे दिया है। लगता है अंकिता मामले से लेकर अन्य ज्वलंत मुद्दों पर अब दून की सड़कों पर परंपरागत धरना-प्रदर्शन कम और अचानक होने वाले ‘सरप्राइज एक्शन’ ज्यादा देखने को मिलेंगे, ऐसे में चुनावी साल में विपक्ष और पुलिस प्रशासन में टकराव की घटनाएं भी बढ़ेंदी। इन हालात में आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सियासत का पारा और चढ़ना तय है!
Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.








