गोवा में 1200 हेक्टेयर बंजर जमीन पर होगी खेती, जर्मनी की तकनीक से बदलेगी तस्वीर

पणजी
 गोवा के कृषि क्षेत्र में जल्द ही एक नया बदलाव देखने को मिल सकता है। Bicholim (बिचोलिम) की किसान उत्पादक संस्था (FPO) ने अपनी बंजर और खाली पड़ी जमीनों को उपजाऊ बनाने के लिए जर्मनी की आधुनिक कृषि तकनीकों और टिकाऊ खेती के तरीकों से प्रेरणा लेने का फैसला किया है।

इस योजना के तहत FPO ने 1200 हेक्टेयर बंजर) जमीन पर खेती शुरू करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इसके लिए जर्मन एक्सपर्ट्स की तकनीकी मदद से आधुनिक मशीनों से खेती और एग्रो-टूरिज्म (कृषि पर्यटन) की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

चार दिन का खास ट्रेनिंग प्रोग्राम संपन्न
FPO के अधिकारियों के लिए जर्मन विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा आयोजित चार दिन का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जर्मनी में अपनाई जाने वाली आधुनिक कृषि पद्धतियों, मशीनीकरण, ऑर्गेनिक फार्मिंग और टिकाऊ खेती के बुनियादी ढांचे को FPO अधिकारियों को समझाना था।

'ऑगमेंटेड एग्रीकल्चर इंटरनेशनल लिमिटेड' के डॉ. थॉमस वाइल्ड ने बताया कि इस पूरी चर्चा में मुख्य रूप से तीन बातों पर जोर दिया गया।
    कृषि मूल्य श्रृंखला का विकास।
    एग्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देना।
    बंजर पड़ी जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाना।

परंपरा और टेक्नोलॉजी का मेल
गोवा की इन छूटी हुई और बंजर जमीनों को फिर से आबाद करना परंपरा और आधुनिक तकनीक का एक बेहतरीन मेल साबित हो सकता है। इस योजना के तहत मसालों के बागानों और एग्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है, जिससे खेती के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार और उद्यम को भी बढ़ावा मिलेगा।

बिचोलिम के किसान विश्वंभर गवास ने बताया कि इस दिशा में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। जर्मन विशेषज्ञों द्वारा दी गई ट्रेनिंग से इस काम को आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप और तकनीकी सुझाव मिल गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए कृषि विभाग के सहयोग से सरकारी फंड की भी जरूरत होगी।

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