
उत्तराखंड में एक महिला ग्राम प्रधान का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है। ये महिला ग्राम प्रधान केंद्र सरकार की एक योजना के क्रियान्वयन और उसकी शर्तों पर खुलकर आवाज उठा रही हैं। कौन हैं ये महिला ग्राम प्रधान और किस मसले पर ये आवाज उठा रही हैं? चलिए इस आर्टिकल में जान लेते है।
जेनरेशन Z या जेन Z,जो आजकल खूब चर्चाओं में है ये gen z अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं।
और जंतर मंतर में हुए gen z आंदोलन के बाद, सरकार से लेकर सभी पार्टीयां इस जेनरेशन को लुभाना चाह रही हैं।
यहां तक की संसद तक में जेन जी की वोकैबलरी गूंज रही है।
उत्तराखंड की Gen Z प्रधान ने खोली सिस्टम की पोल
हालांकि इसी बीच उत्तराखंड में एक Gen z प्रधान ने सिस्टम की खामियों पर खुलकर बोला है। इस महिला ग्राम प्रधान का वीडियो देखने के बाद आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर हमारे देश में योजनाएं किसके लिए और क्यों बन रही हैं।
दरअसल ये पूरा मामला जुड़ा है MGNREGA योजना से जो अब VBGRamG के नाम से जानी जाती है।
वीरा ने VBGRamG योजना के तहत विकास के दावों की खोली पोल
पौड़ी के मरोड़ा गांव की gen z ग्राम प्रधान वीरा रावत ने VBGRamG योजना को लेकर सिस्टम से ऐसे सवाल पूछे हैं। जिसका जवाब शायद ही किसी अधिकारी के पास हो। वीरा ने VBGRamG योजना के तहत हो रहे विकास के दावों की ऐसी पोल खोली है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।
वीरा अपने इस वीडियो में बताती हैं कि VBGRamG योजना में काम करने वाले एक मजदूर को एक दिन के 300 रुपये दिए जाते हैं। लेकिन ये 300 रुपये हासिल करने के लिए उन्हे सिस्टम की खामियों से भी जूझना पड़ता है।
पहले KYC करवानी होगी, फिर फेस वेरिफिकेशन और उसके बाद दिन में दो-दो बार हाजिरी लगानी होगी। वीरा VBGRamG में बरती जा रही पारदर्शिता के तौर तरीकों पर एक तरह से सवाल उठाती हैं और साथ ही उनकी व्यावहारिकता पर भी। वीरा कहती हैं कि एक तरफ तो सरकार ठेकेदारों को तीन-तीन करोड़ रुपये के बड़े ठेके बांट देती है। लेकिन उन तीन करोड़ रुपयों से बनने वाली इमारतें, पुल और सड़कें जब भरभरा कर गिर जाती हैं, तब पारदर्शिता कहां चली जाती है। तब न कोई सख्त ट्रैकिंग होती है। न कोई पुख्ता रिकॉर्ड रखा जाता है।
VB-G Ram G में महज 300 रुपये की दिहाड़ी
लेकिन, दूसरी तरफ उसी देश में उसी गांव में जब एक गरीब मजदूर VB-G Ram G योजना के तहत दिन भर पसीना बहाकर महज 300 रुपये की दिहाड़ी कमाने आता है। तो सरकार उस पर नियमों की पोथी थोप देती है। वीरा रावत अपने इस वीडियो में पूछती हैं कि क्या 300 रुपये पाने वाला एक गरीब मजदूर कोई बहुत बड़ा घोटाला कर देगा?
क्या देश का खजाना उस 300 रुपये की दिहाड़ी से लुट रहा है। जो उससे पल-पल का हिसाब मांगा जा रहा है। जबकि तीन-तीन करोड़ के ठेके लेने वाले बिना किसी जवाबदेही के मस्त घूम रहे हैं। इसके अलावा वीरा रावत इन गरीब मजदूरों पर पड़ रही VBGRamG के ऐप की तकनीकी मार को लेकर भी सवाल उठा रही हैं।
VB-G Ram G में भी खामिया
वीरा रावत बकायदा सबूतों के साथ दिखा रही हैं कि VB-G Ram G योजना के ऐप में नए अपडेट के बाद ये ऐप काम नहीं कर रहा। KYC होने के बावजूद ऐप मजदूरों का चेहरा पहचान ही नहीं पाता और उस दिन मजदूर की हाजिरी दर्ज ही नहीं होती। यानी, मजदूर ने दिनभर कड़ी धूप और ठंड में पसीना बहाया, काम किया, लेकिन ऐप की एक तकनीकी गलती की वजह से उसकी उस दिन की 300 रुपये की दिहाड़ी कट जाती है।
योजना में सख्ती पर उठाए सवाल
वीरा रावत यहां तक कहती नजर आती हैं कि आज के दौर में गांवों में एक मजदूर की दिहाड़ी 500 से 600 रुपये के बीच होती है। लेकिन VBGRamG योजना के तहत सरकार उसे सिर्फ 300 रुपये दे रही है। आधी दिहाड़ी देने के बावजूद, सरकार ने इस योजना में इतनी ज्यादा सख्ती कर दी है, इतने अजीबोगरीब नियम थोप दिए हैं, कि लोग अब इस सिस्टम से तंग आ चुके हैं।
प्रधान वीरा रावत पहले भी रह चुकी चर्चाओं में
पौड़ी के मरोड़ा गांव की प्रधान वीरा रावत पहले भी अपने फैसलों और अपने वीडियोज के चलते चर्चाओं में रह चुकी हैं। उनका नया वीडियो VBGRamG के तकनीकी पक्ष की मुश्किलों को सामना लाता है। ऐसा लगता है कि वीरा रावत इस योजना की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े कर रही हैं। वीरा रावत के इस वीडियो पर आपकी क्या राय है
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