हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद: दलित अस्मिता को लेकर फिर मुखर हुए हरदा, दिल्ली की घटना से जोड़ा मामला

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद आयोजित हुए कथित ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर उपजा सियासी विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने जहां एक तरफ प्रदेश की राजनीति में सामाजिक न्याय और जातिगत असमानता के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है, वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने इसे राष्ट्रीय संदर्भों से जोड़ते हुए हमला बोला है।

दिल्ली की जातिगत हिंसा और हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’: एक ही मानसिकता का द्योतक

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी पहली पोस्ट में देश की राजधानी दिल्ली की एक कथित घटना को उजागर करते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने बताया कि भाजपा के एक सम्मानित विधायक ने अपनी ही पार्टी के मंडल अध्यक्ष के साथ सिर्फ इसलिए मारपीट, लात-घूंसे और चप्पलें चलाईं क्योंकि वे दलित समाज से आते हैं। रावत ने इसे अत्यंत लज्जाजनक और घृणित सोच करार दिया। इसी संदर्भ में उन्होंने इस प्रकरण को सीधे तौर पर हल्द्वानी के बहुचर्चित ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ विवाद से जोड़ा।

हरीश रावत का कहना है कि हल्द्वानी में कांग्रेस के शीर्ष दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद मैदान का शुद्धिकरण कराना और दिल्ली में दलित कार्यकर्ता के साथ हिंसा करना दोनों घटनाएं समाज में गहराई से रची-बसी एक ही संकीर्ण और सामंती मानसिकता का प्रमाण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और देश की जनता की लड़ाई इसी भेदभावपूर्ण सोच के खिलाफ है और इसके विरोध में हर स्तर पर पुरजोर आवाज उठाई जानी चाहिए।

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UPI मर्चेंट चार्ज के बहाने डिजिटल अर्थव्यवस्था पर तंज

अपनी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट में हरीश रावत ने एक बिल्कुल अलग, लेकिन हर नागरिक की जेब से सीधे जुड़े ज्वलंत आर्थिक मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से ₹2,000 से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर मर्चेंट चार्ज (PPI फीस) लगाए जाने के फैसलों पर चुटकी लेते हुए रावत ने लिखा—”UPI का जलवा दिखाई देने लगा। वाह!”

उन्होंने इस नई कर-व्यवस्था की अंदरूनी हकीकत पर सवाल उठाते हुए कहा कि भले ही कागजों पर यह शुल्क व्यापारी से वसूलने की बात कही जा रही हो, लेकिन व्यवहारिक रूप से व्यापारी इसकी भरपाई अंततः आम उपभोक्ता (ग्राहक) की जेब काटकर ही करेगा। रावत ने तंज कसते हुए कहा कि यह तकनीक का ऐसा नायाब उपयोग है, जिसमें आम आदमी की जेब खाली करने का हुनर शामिल हो गया है।

डबल इंजन सरकार पर साधा हरदा ने निशाना

हरीश रावत ने जिस तरह भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। उससे साफ है कि हल्द्वानी के घटनाक्रम के बाद उपजे इस नए विवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में सामाजिक न्याय कांग्रेस का बड़ा चुनावी हथियार बनने वाली है। खड़गे के अपमान से उपजे जनक्रोध के बीच दिल्ली की जातिगत हिंसा का जिक्र कर रावत ने यह स्थापित करने का प्रयास किया है कि वंचित वर्ग के प्रति यह भेदभाव किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विचारणीय सामाजिक संकट है। इसके माध्यम से उन्होंने प्रदेश में दलित वोट बैंक को कांग्रेस के पक्ष में गोलबंद करने की कोशिश की है।

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