धारचूला विधानसभा क्षेत्र में आयोजित हुई ‘अल्ट्रा मैराथन’ को लेकर सूबे की राजनीति गर्मा गई है। क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर जोरदार हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उनके ही विधानसभा क्षेत्र में हुए इतने बड़े सरकारी आयोजन में उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया। उन्होंने इसे सिर्फ अपना व्यक्तिगत अपमान ही नहीं, बल्कि धारचूला की जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक परंपराओं का खुला अनादर करार दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले कार्यक्रम किसी व्यक्ति विशेष की निजी जागीर नहीं हैं। सरकारी कार्यक्रमों में राजनीतिक दुर्भावना से ऊपर उठकर सभी जनप्रतिनिधियों को उनका हक और सम्मान मिलना ही चाहिए।
“आखिर इतना डर किस बात का है?”
मीडिया को संबोधित करते हुए विधायक हरीश धामी ने बेहद सख्त लहजे में सवाल उठाया, “आखिर मुख्यमंत्री को इतना डर किस बात का है कि अपने ही विधानसभा क्षेत्र में आयोजित सरकारी कार्यक्रम में स्थानीय विधायक को न्योता तक देना उचित नहीं समझा गया?” उन्होंने कहा कि क्या अब सरकार के दबाव में आकर जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान की अनदेखी की जाएगी? धामी ने कहा कि एक तरफ तो सरकारी कार्यक्रमों के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, और दूसरी तरफ जनता के चुने हुए प्रतिनिधि को जानबूझकर इन आयोजनों से दूर रखा जा रहा है। ऐसे में सरकारी पैसे के इस्तेमाल, कार्यक्रम के आयोजन और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना बिल्कुल स्वाभाविक है।
विधानसभा सभा में पेश करेंगे विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव
विधायक हरीश धामी ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे इस मामले में चुप्पी नहीं साधेंगे। वे इस मुद्दे को लेकर मंगलवार से शुरू हो रहे गैरसैंण विधानसभा सत्र में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष ‘विशेषाधिकार हनन’ का प्रस्ताव पेश करेंगे, ताकि यह सच सामने आ सके कि आखिर एक चुने हुए विधायक को उसके अपने ही इलाके के सरकारी कार्यक्रम से बाहर रखने के पीछे किसकी चाल थी।
“2027 में जनता चुकता करेगी पाई-पाई का हिसाब”
धामी ने कहा कि सत्ता के अहंकार में आकर जनप्रतिनिधियों की आवाज को कभी दबाया नहीं जा सकता। जनता ने उन्हें अपनी समस्याएं उठाने और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनकर भेजा है। किसी भी सरकारी कार्यक्रम से विधायक को अलग रखकर जनता के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने पूछा कि क्या किसी अल्ट्रा मैराथन में क्षेत्रीय विधायक को बुला लेने से सरकार की साख कम हो जाती? लोकतंत्र में विपक्ष और असहमति का सम्मान करना सरकार का फर्ज होता है। अंत में धामी ने चेतावनी देते हुए कहा कि धारचूला की जनता इस भेदभाव और अनदेखी को देख रही है। साल 2027 के चुनाव में जनता लोकतांत्रिक तरीके से इस अहंकार और अपमान का हिसाब जरूर चुकता करेगी। जनता का सम्मान ही सबसे ऊपर है और जनादेश का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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