दुष्यंत गौतम के राज्यपाल बनने पर गरमाई उत्तराखंड की सियासत, कांग्रेस ने काटा हंगामा

उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। भाजपा के पूर्व राज्य प्रभारी और वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। इस नियुक्ति के तुरंत बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने देहरादून के गांधी पार्क में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

दुष्यंत गौतम के सिक्किम का राज्यपाल बनने पर गरमाई सियासत

विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ने अपनी छवि बचाने और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े संवेदनशील मामलों के राजनीतिक नफे-नुकसान से बचने के लिए गौतम को उत्तराखंड से कोसों दूर राज्यपाल बनाकर ‘सेफ पैसेज’ दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का मुख्य हमला दुष्यंत कुमार गौतम के उस कार्यकाल पर है जब वे उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी थे। इस दौरान राज्य में अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसी दर्दनाक घटना सामने आई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का आरोप रहा है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई बड़े नाम और सत्ता के गलियारों से जुड़े लोग संदेह के घेरे में आए थे।

कांग्रेस का कहना है कि जब-जब इस मामले की गहराई से जांच की मांग उठी और विपक्ष ने सत्ता पक्ष को घेरा, तब-तब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर असहज सवाल खड़े हुए। ऐसे संवेदनशील और विवादों से घिरे नेता को संवैधानिक पद पर आसीन करना और वह भी एक ऐसे राज्य के रूप में जहां उनकी राजनीतिक सक्रियता और जवाबदेही पर सवाल उठते रहे हों, जनता के बीच गलत संदेश देता है।

रणनीति के तहत दुष्यंत गौतम को भेजा उत्तराखंड से दूर सिक्किम

विपक्षी दलों का यह भी मानना है कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी नफा-नुकसान से बचने के लिए भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत दुष्यंत कुमार गौतम को उत्तराखंड से बहुत दूर सिक्किम भेज दिया है। विपक्ष इसे ‘प्रमोशन’ और दागी चेụरों को मलाईदार पदों से नवाजने की नीति करार दे रहा है। उनका कहना है कि संवैधानिक पदों की गरिमा का इस्तेमाल इस तरह राजनीतिक दवाब और आरोपों से घिरे नेताओं को बचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

राजनीतिक रोटियां सेक रही कांग्रेस: BJP

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस के इन तमाम आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि दुष्यंत गौतम एक अनुभवी और वरिष्ठ संगठक रहे हैं, जिनकी कार्यक्षमता को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें इस संवैधानिक जिम्मेदारी के योग्य समझा है। भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह केवल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए संवैधानिक पदों और नियुक्तियों पर अनावश्यक बयानबाजी कर रही है।

बहरहाल, राज्यपाल जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर नियुक्ति को लेकर राज्य में छिड़ा यह राजनीतिक संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांधी पार्क में कांग्रेस का यह धरना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा हथियार बनने वाला है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और अधिक गहरा सकता है।

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