धामी सरकार का सबसे बड़ा एक्शन, पूरी तरह बदल गया मदरसों का सिस्टम

धामी सरकार ने उत्तराखंड में मदरसों का पूरा सिस्टम ही बदल कर रख दिया है। सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने 2 सितंबर को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए उत्तराखंड के 26 मदरसों को नई मान्यता दी। अब उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है और अब हर मदरसे में नया सिस्टम लागू करना जरूरी हो गया है।

सीएम धामी का मदरसों की व्यवस्था को लेकिन ऐतिहासिक कदम

यूसीसी के ऐतिहासिक कदम के बाद अब पुष्कर सिंह धामी सरकार ने मदरसों की व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक चला है। जिसने सबको चौंका दिया अब राज्य में मदरसों में हिसाब किताब के कुछ भी नहीं चलेगा। 2 सितंबर को सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नई पॉलिसी के तहत मान्यता प्रमाण पत्र सौंपे।

मान्यता पाने वाले मदरसों की कुल संख्या अब 33

इसी के साथ उत्तराखंड में नई नीति के तहत मान्यता पाने वाले मदरसों की कुल संख्या अब 33 हो चुकी है। उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग करने के साथ राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया गया। इसके तहत उत्तराखंड में मदरसों का रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

मदरसों में भी NCERT का सिलेबस लागू

इसी अथॉरिटी ने नया सिलेबस बनाया और मदरसों में भी NCERT का सिलेबस लागू कर दिया गया। यानी अब मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को सिर्फ धार्मिक शिक्षा ही नहीं बल्कि साइंस,मैथ्स, सोशल साइंस और इंग्लिश पढ़ना जरूरी हो गया है।

वहीं मदरसों में क्या पढ़ाया जाएगा? धार्मिक शिक्षा का ढांचा क्या होगा? ये अब मदरसा संचालक या मौलवी तय नहीं कर सकेंगे। ये जिम्मेदारी भी अब पूरी तरह से राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की होगी। यहां पर आपको ये भी बता दें कि अगर उत्तराखंड में किसी मदरसे को मान्यता चाहिए तो उसे अपनी हर चीज का ब्योरा देना होगा।

मदरसे की इमारत की भी होगी जांच

प्राधिकरण की विशेष टीमें अब खुद मौके पर जाकर जांच करेंगी कि मदरसे की इमारत यानी भवन किस स्थिति में बना है?
क्या कमरे में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह है? क्या एक कमरे में सीमा से ज्यादा बच्चे तो नहीं ठूंस दिए गए? क्या वहां पीने का साफ पानी, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं?

मदरसा बोर्ड खत्म!

अगर इनमें से एक भी पैमाने पर कोई मदरसा नाकाम रहा तो उसे मान्यता का सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। इस नई व्यवस्था के दायरे में सिर्फ इस्लामिक संस्थाएं ही नहीं आएंगी। बल्कि सिख बौद्ध और ईसाई समुदाय की शिक्षण संस्थों को भी इसमें शामिल किया गया है ताकि हर वर्ग को एक समान और पारदर्शी शित्रा मिल सके। यूसीसी के बाद मदरसा बोर्ड खत्म करने और मदरसों को मान्यता देने को पूरे देशभर में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

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