26 हजार न्यूनतम वेतन से लेकर MSP की मांग, ट्रेड यूनियनों ने राष्टपति को भेजा ज्ञापन – Khabar Uttarakhand

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उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले मजदूरों और किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से ज्ञापन भेजकर केंद्र सरकार से अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

26 हजार न्यूनतम वेतन से लेकर MSP की मांग

उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन्स संघर्ष समिति संयुक्त किसान मोर्चा राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत आज के इस प्रदर्शन के माध्यम से निम्नलिखित मांगें की है।

  1. न्यूनतम वेतन 26,000/- रूपये प्रतिमाह किया जाय।
  2. श्रम संहिता और निमयों को निरस्त करें, औपचारिक व अनऔपचारिक सभी श्रमिकों के लिए संघ बनाने, पंजीकरण, मान्यता, 8 घण्टे का कार्य दिवस, कार्यस्थल, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, हडताल का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार सुनिश्चित करें और निश्चित अवधि के रोजगार को समाप्त करें।
  3. सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) को C2+50% पर सुनिश्चित करें और खरीद की गांरटी दें।
  4. विद्युत संशोधन विधयेक 2025 को वापस लें। शान्ति अधिनियम को निरस्त करें और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाये।
  5. सभी श्रमिकों, जिनमें योजना श्रमिक और ध्याड़ी मजदूर शामिल है, के लिए मजदूरी 42000 रूपये तक बढ़ाये और मंहगाई भत्ते से जोड़कर सुनिश्चित करें
  6. ग्राम जनकल्याण अधिनियम को रद्द करें और एमजीएमआरईजीए के 200 दिनों के काम और 700/- रूपये दैनिक मजदूरी के साथ बहाल करें।
  7. सरेंडर और सब ऑर्डिनेटिगं व्यापार समझौतों को रद्द करें।
  8. किसानों और दलित लोगों के लिए व्यापक ऋण माफी की जाय।
  9. कृषि संसाधन नियंत्रण अधिनियम का शक्ति से पालन करें।
  10. उत्पादक सहकारी समितियों के तहत कृषि का आधुनिकीकरण करें, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पी०एस०यू०) के तहत कृषि आधारित उद्योगों और सहकारी क्षेत्र का आधुनिकीकरण करें।
  11. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण/ विनिवेश और बिक्री पर रोक लगायें, एनएमपी 2.0, प्राकृतिक संसाधनों की लूट, आउटसोर्सिगं और ठेकेदारी पर रोक लगाए।
  12. ओपीएस (ऑपरेशनल पेंशन) को बहाल करें, ईपीएस-95 में वृद्धि करें और सभी को सार्वभौमिक पेंशन प्रदान करें।
  1. पेपर लीक मामलें में हुए आंदोलन में गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तत्काल रिहा किया जाय च उनके ऊपर लगे मुकदमें वापस लिए जाए।
  2. ईपीएफ और पेंशन निकासी के लिए पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए व एक वर्ष से कम सेवा वाले कर्मचारियों को भी ईपीएफ एडवांस निकालने का अधिकार दिया जाए। पीएफ की 100 प्रतिशत, फार्म 10-सी ऑनलाईन भरने की दोबारा सुविधा दी जाए, यू.ए.एन. में नाम, जन्म तिथि, पिता/पति का नाम, नियुक्ति की तिथि, सेवा समाप्ति की तिथि और अन्य विवरणों में संशोधन का अधिकार आधार सत्यापन के माध्यम से सीधे सदस्यों को दिया जाए, एनसीपी डेज दर्ज एवं संशोधित करने की सुविधा सदस्यों को दी जाय, सभी पी०एफ० दावों का समयबद्ध निस्तारण किया जाय, ऑनलाईन के साथ 2 ऑफलाईन पी०एफ०दावा स्वीकार करने की व्यवस्था लागू की जाए।