
उत्तराखंड में SIR नोटीस के बाद लोगों की निंद उड़ गई है पोलिंग बूथों पर कोरोना और नोटबंदी जैसी अफरातफरी का माहौल देखने मिल रहा है। नैनीताल में तो ऐसा हडकंप मचा है की पोलिंग बूथों में लोग लंबी कतार लगाए पैनिक मोड़ में नजर आ रहे हैं।
Uttarakhand SIR: 19 लाख लोगों को नोटिस
उत्तराखंड में SIR के बीच करीब 19 लाख लोगों को नोटिस थमा दिए गए हैं। जिसके बाद पूरे राज्य में ऐसा हड़कंप मचा कि पोलिंग बूथों के बाहर लोगों की लंबी कतार है। बुजुर्ग हों, महिलाएं हो या नौजवान सभी अपने अपने दस्तावेज और नोटिस लेकर मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। सबके अंदर बेचैनी साफ दिखाई दे रही है।
नोटिस लेकर मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे लोग
किसी को अपने नाम की स्थिति जाननी है, कोई पता या दूसरी जानकारी ठीक कराना चाहता है। तो कई लोग सिर्फ ये समझने आए हैं कि नोटिस मिलने के बाद उन्हें अब क्या करना है? ऐसा इसलिए क्योंकि अबतक इन लोगों को जिंदगी में ऐसा कोई नोटिस मिला नहीं मिला। जिस वजह से इस नोटिस के बाद लोग घबरा गए हैं।
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वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर
सबके अंदर यही डर है कि कहीं उनका नाम वोटर लिस्ट से काट ना दिया जाए और वो अपने मतदान के अधिकार से वंचित ना रह जाएं। हालांकि इन नोटिसों में मतदाताओं से उनकी पहचान नाम या पते की पुष्टि करने को कहा जा रहा है।
लेकिन जिस तरह से राज्य में धड़ाधड़ नोटिस बांटे गए हैं। उसने लोगों के अंदर ऐसी घबराहट पैदा कर दी है की लोग पोलिंग बूथों की तरफ भागे चले जा रहे हैं। कुछ लोग SIR के नोटिस के बाद की इस सिचुऐशन की तुलना कोरोना और नोटबंदी के दौर से भी करने लगे हैं।
बसे खराब हालात नैनीताल में
मीडिया रिपोर्टस की मानें तो सबसे खराब हालात तो नैनीताल में हैं। जहां 25 वोटरों को नोटिस मिले हैं। जिनमें सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी और विधायक सरिता आर्य भी शामिल हैं। वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर और अफरातफरी का माहौल लोगों को सुबह सुबह पोलिंग बूथों तक खिंच रहा है।
दस्तावेजों को लेकर भी भ्रम की स्थिति
मतदाताओं को आशंका है कि अगर उन्होंने वक्त पर प्रक्रिया पूरी नहीं की तो कहीं वो मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाएं। जिस वजह से पोलिंग बूथों के बाहर लोगों की लंबी कतार लगी है।
कई लोग तो अपना काम-धंधा छोड़कर आए हैं। घंटों लाइन में खड़े हैं लेकिन बूथों पर जो हालात हैं, वो परेशानी को और बढ़ा रहे हैं। हालांकि कई लोग ऐसे हैं जिनको नोटिस के बाद कौनसे दस्तावेज जमा करने हैं। इसको लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
सालों पहले के कागजात नहीं
कुछ लोग तो इसलिए भी परेशान हैं कि उनके पास सालों पहले के कागजात ऐविलेबल नहीं हैं। हालांकि वो दशकों से अपने क्षेत्र के वोटर हैं तो क्या उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा? लोगों का कहना है कि चुनाव आयोग के कर्मचारी और अधिकारी भी उन्हें साफ-साफ कुछ नहीं बता रहे ना कोई स्पष्ट गाइडलाइन है ना कोई हेल्पडेस्क पोलिंग बूथ में भी बस भीड़ और भ्रम है।
नोटिस मिलने के बाद सहम गई नैनीताल की दीपा
दैनिक भास्कर में पबलिश्ड एक खबर के मुताबिक, नैनीताल में रहने वाली दीपा पाठक बताती हैं कि जब उन्हें ये नोटिस मिला तो वो सहम गई क्योंकि पहले कभी उन्हें ऐसा नोटिस नहीं आया था। जब वो बूथ पर पहुंचीं तो उनसे ऐसे पुराने दस्तावेज मांगे गए जो उनके पास हैं ही नहीं।
अब वो परेशान हैं कि बिना उन कागजातों के उनका नाम कैसे बचेगा। हालांकि नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मतदाताओं की समस्याओं को गंभीरता से लिया है। जैसे-जैसे SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे लोगों के अंदर चिंता और बेचैनी भी बढ़ती जा रही है।







