उत्तराखंड की राजनीति में प्रतिनिधियों की डिजिटल सुरक्षा, निजता और फर्जी ऑडियो-वीडियो (डीपफेक) सामग्री के बढ़ते खतरे को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र लिखकर हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश की सुरक्षा और निजता से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर साइबर विशेषज्ञों से निष्पक्ष, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए।
क्या है पूरा मामला?
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए आधिकारिक पत्र में कहा है कि हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने अपनी डिजिटल सुरक्षा, व्यक्तिगत और पारिवारिक निजता तथा सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर बेहद गंभीर आशंकाएं जाहिर की हैं।
विधायक को अंदेशा है कि उनके मोबाइल फोन, अन्य डिजिटल गैजेट्स, वाहनों और परिवार के सदस्यों के मोबाइल तक किसी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंसी की पहुंच (हैकिंग/जासूसी) बनाई जा सकती है या उनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के जरिए उनकी फर्जी/कूटरचित (डीपफेक) ऑडियो या वीडियो सामग्री बनाकर सोशल मीडिया और जनता के बीच भ्रम फैलाने के लिए प्रसारित की जा सकती है।
पुलिस की ढिलाई पर उठाए सवाल
यशपाल आर्य ने पत्र में इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि इस विषय में पहले ही पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत दी जा चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद, पुलिस ने अब तक इस शिकायत पर क्या कार्रवाई की या जांच का क्या नतीजा निकला, इसकी कोई जानकारी शिकायतकर्ता विधायक को उपलब्ध नहीं कराई गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि पिछली शिकायत के अभिलेख प्राप्त कर उसकी समीक्षा की जाए। अगर जांच अभी तक लंबित पड़ी है, तो उसमें बिना किसी बेवजह देरी के तुरंत कार्रवाई पूरी की जानी चाहिए।
पत्र में की गई छह मांगें
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 6 मुख्य बिंदुओं पर तत्काल निर्देश जारी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सुमित हृदयेश द्वारा पहले दी गई लिखित शिकायत पर अब तक की गई जांच और कार्रवाई की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाए और रिपोर्ट विधायक को दी जाए। विधायक के मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों, सोशल मीडिया खातों और अन्य डिजिटल माध्यमों की सुरक्षा का तकनीकी और विधिसम्मत आकलन कराया जाए।
यदि अनधिकृत पहुंच, डेटा चोरी या AI द्वारा फर्जी ऑडियो-वीडियो बनाने का कोई प्रमाण सामने आता है, तो सक्षम साइबर विशेषज्ञों के माध्यम से निष्पक्ष जांच कराकर नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखा जाए ताकि उनमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो सके।
विधायक और उनके परिवार की व्यक्तिगत निजता और सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं को देखते हुए आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं। संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से मामले का निस्तारण करने के निर्देश दिए जाएं और शिकायतकर्ता को समय-समय पर प्रगति की जानकारी दी जाए।
लोकतांत्रिक मूल्यों और निजता की रक्षा पर जोर
पत्र के अंत में यशपाल आर्य ने लिखा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक की व्यक्तिगत सुरक्षा, निजता और सामाजिक प्रतिष्ठा की रक्षा करना कानून-व्यवस्था का मूल कर्तव्य है। जनप्रतिनिधियों से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में बिना किसी पूर्वाग्रह के निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर अपराधों के इस युग में समय पर उचित कार्रवाई न केवल संबंधित व्यक्ति का विश्वास बहाल करने के लिए जरूरी है, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और उत्तराखंड पुलिस इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाती है।
Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.








