
शांत से रहने वाले देहरादून में आए दिन अपसी झगड़ों और गोली चलने की घटनाएं अभ आम हो गई है। एक बार फिर गोलियों की गूंज से दून दहल गया है। ऐसा लग रहा है कि राजधानी में अब खाकी का खौफ खत्म हो चुका है। बीते दिन पटेलनगर और शिमला बाइपास में दिन दहाड़े हुई फायरिंग ने राजधानी की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शांत रहने वाले देहरादून में खत्म हो रहा खाकी का खौफ
20 अगस्त को करीब साढे तीन बजे पटेलनगर में युवकों के दो गुटों के बीच विवाद हुआ। ये विवाद सोशल मीडिया पर पोस्ट और कमेंट से शुरू हुआ था जो इसके बाद सड़क पर उतर आया। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सबसे पहले एक गुट ने लाठी डंडे लेकर दूसरे गुट की कार का शीशा तोड़ दिया। जिसके बाद कार सवार गुट ने लाठी डंडे लेकर पहुंचे लोगों पर फायरिंग कर दी और कार से वहां से निकल गए। हालांकि दूसरे गुट ने उनका पीछा करना शुरु कर दिया।
राजधानी में खुलेआम हो रही फायरिंग की घटना
शिमला बाइपास के पास ये दोनों गुट फिर आमने सामने आ गए और कार सवार लोगों फिर फायरिंग की जिसमें होटल मैनेजमेंट के एक 21 साल के छात्र के सीने में गोली लग गई। कहने को तो देहरादून राज्य की राजधानी है, राज्य का सबसे बड़ा पुलिस महकमा यहीं है। खुद मुख्यमंत्री से लेकर शासन के आला अधिकारी इसी शहर में रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद ये पहली बार नहीं है जब राजधानी में इस तरह खुलेआम फायरिंग हुई हो।
11 फरवरी: तिब्बती मार्केट गोलीकांड
अगर हम 2026 की ही बात करें तो 11 फरवरी को तिब्बती मार्केट में गोलीकांड हुआ जहां गैस एजेंसी संचालक अर्जुन शर्मा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई।
13 फरवरी: सिल्वर सिटी मॉल में फायरिंग
इसके महज दो दिन बाद 13 फरवरी को राजपुर रोड़ के सिल्वर सिटी मॉल में विक्रम शर्मा नाम के शख्स की, जिम से बाहर निकलते वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई।
30 मार्च: मॉर्निग वॉक पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर की गोली से मौत
फिर 30 मार्च को राजपुर रोड़ में दो कार सवार गुटों के बीच फायरिंग हुई जिसमें मॉर्निग वॉक पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी गोली की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई।
4 जुलाई: ठेके के बाहर फायरिंग हुई
4 जुलाई को रायपुर रिंग रोड़ में छह नंबर पुलिया के पास शराब के ठेके के बाहर फायरिंग हुई जिसमें दो युवक घायल हुए।
और अब पटेलनगर में 20 अगस्त का ये गोलीकांड।
देहरादून में बदमाशों के हौसले इस कदर बुलंद है कि ना तो उन्हें सीसीटीवी कैमरों की परवाह है, ना पुलिस की। देहरादून जो कभी अपनी शांति के लिए जाना जाता था आज यहां लोग अपने घरों से बाहर निकलने में ही घबरा रहे हैं। बदलते हुए देहरादून की ये तस्वीर डराने वाली है। अब देखना ये होगा कि पुलिस की कार्यशैली पर उठते इन सवालों के बाद क्याकप्तान साहब अपनी खाकी की साख बचा पाते हैं?








