उत्तराखंड की प्रशासनिक राजधानी देहरादून से एक बड़ी और सुकून भरी खबर सामने आ रही है। अक्सर अपनी पुरानी इमारतों, सीमित जगह और पार्किंग की समस्याओं से जूझने वाले सचिवालय परिसर की सूरत अब पूरी तरह बदलने वाली है। जी हां, सचिवालय में कामकाज को आधुनिक और आसान बनाने के लिए एक नया, भव्य और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस छह मंजिला वैकल्पिक भवन तैयार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से न सिर्फ अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि सचिवालय आने आम लोगों के कई जरूरी काम भी एक ही छत के नीचे बेहद आसानी से हो जाएंगे।
59.34 करोड़ रुपये का है पूरा प्रोजेक्ट
सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत 59.34 करोड़ रुपये (5934.71 लाख रुपये) है। राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन इस भवन के निर्माण के लिए पिछले साल 26 मार्च 2025 को ही शासनादेश जारी कर दिया गया था। इस कुल बजट में से 4127.05 लाख रुपये सिविल निर्माण कार्यों पर और 1807.26 लाख रुपये अत्याधुनिक विद्युतीकरण पर खर्च किए जा रहे हैं। विश्वकर्मा भवन के बिल्कुल पास बन रहे इस छह मंजिला भवन का क्षेत्रफल भी काफी बड़ा है। यह करीब 34×74 मीटर आकार के प्लॉट (लगभग 2516 वर्गमीटर भूमि) पर खड़ा किया जा रहा है। बेसमेंट को मिलाकर इस पूरे भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल 1,04,480 वर्गफुट होगा, जो प्रशासनिक व्यवस्थाओं को एक नया आयाम देगा।
बेसमेंट में पार्किंग और ग्राउंड फ्लोर पर बैंक-डाकघर जैसी सुविधाएं
सचिवालय परिसर में हमेशा से गाड़ियों की पार्किंग एक बड़ी सिरदर्द रही है। इस समस्या से निजात पाने के लिए नए भवन के बेसमेंट में शानदार पार्किंग बनाई जा रही है, जहां एक साथ 25 कारें और 100 दोपहिया वाहन पार्क किए जा सकेंगे। इतना ही नहीं, भवन के ग्राउंड फ्लोर पर आम जनता और कर्मचारियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया है। यहां भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा, एक डाकघर, एक्सटेंशन लॉबी और एक आरामदायक प्रतीक्षालय (वेटिंग रूम) बनाने का प्रस्ताव है। इससे सचिवालय आने वाले लोगों को बैंकिंग और डाक संबंधी छोटे-छोटे कामों के लिए बाहर चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
किस मंजिल पर क्या होगा खास?
इस छह मंजिला भवन की पहली और दूसरी मंजिल पर अनुभागीय कार्यालयों और अनुसचिव कार्यालयों की व्यवस्था की गई है। दोनों मंजिलों का क्षेत्रफल 14,934 वर्गफुट प्रति मंजिल है। तीसरी और चौथी मंजिल पर पांच अपर सचिवों के दफ्तर, उनके स्टाफ के लिए कमरे, संयुक्त सचिवों के कार्यालय और एक हाई-टेक बैठक कक्ष (मीटिंग हॉल) बनाया जा रहा है। चौथी मंजिल का क्षेत्रफल भी 14,934 वर्गफुट है, जो कार्यालयों की कमी को पूरी तरह दूर कर देगा। सबसे ऊपरी यानी पांचवीं मंजिल पर सात प्रमुख सचिवों के भव्य कार्यालय, स्टाफ रूम, प्रतीक्षालय और बड़ी बैठकों के लिए विशेष कक्ष तैयार किए जा रहे हैं। इस तरह ग्राउंड से लेकर पांचवीं मंजिल (G+5) तक सभी स्तर के अधिकारियों के बैठने, मीटिंग करने और जनता से मिलने के लिए एक ही परिसर में बेहतरीन इंतजाम हो जाएंगे।
60 फीसदी काम पूरा, मार्च 2027 तक उद्घाटन का लक्ष्य
इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, भवन का जी+5 स्ट्रक्चरल ढांचा पूरी तरह तैयार हो चुका है। इसके अलावा अंदरूनी ब्लॉक की चिनाई का काम भी पूरा हो गया है और प्लास्टर का काम करीब 90 प्रतिशत तक निपट चुका है। फिलहाल बाहरी प्लास्टर, छत (टेरेस) पर भारी ट्रस लगाने, टॉयलेट की प्लंबिंग और अतिरिक्त बिजली-फिटिंग का काम युद्धस्तर पर जारी है। इस प्रोजेक्ट की कुल भौतिक प्रगति (फिजिकल प्रोग्रेस) अब तक 60 प्रतिशत दर्ज की जा चुकी है। विभाग ने इसका निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2027 तय किया है।
प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और रफ्तार पर कड़ी नजरः सचिव डॉ. राजेश कुमार
आवास एवं राज्य संपत्ति सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और जनता के काम पारदर्शी व सुगम तरीके से निपटाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। सचिवालय परिसर में बन रहा यह छह मंजिला वैकल्पिक भवन इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस परियोजना की गुणवत्ता और रफ्तार पर लगातार कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि तय समयसीमा यानी मार्च 2027 तक यह शानदार भवन बनकर तैयार हो जाए और सचिवालय की कार्यप्रणाली को एक नई रफ्तार मिल सके।
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