उत्तराखंड में एक बड़े भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। वैज्ञानिकों ने बड़ी चेतावनी दी है। हिमालयी क्षेत्र में बड़े भूकंप का खतरा बना हुआ है। प्रदेश में पिछले एक हफ्ते में ही दो बार भूकंप आया है। गनीमत रही है कि इस भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली। लेकिन वैज्ञानिकों की माने तो खतरा टला नहीं है क्योंकि उत्तराखंड की धरती संवेदनशील है, और आगे बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
उत्तराखंड में आए दिन भूकंप के झटके हो रहे महसूस
उत्तराखंड, जहां आए दिन भूकंप के झटके महसूस होते हैं। हर झटका अपने साथ छोड़ एक बड़ा सवाल जाता है। सवाल है कि क्या हिमालय में किसी बड़े भूकंप की आहट है? 6 अक्टूबर की रात चमोली जिले में आए 4.9 मैग्नीट्यूड के भूकंप और 10 अक्टूबर को उत्तरकाशी में 4.2 मैग्नीट्यूड के भूकंप ने एक बार फिर इस खतरे की ओर ध्यान खींचा है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र चमोली जिले में था।
चमोली, उत्तरकाशी और फिर बागेश्वर में भूकंप
इसकी गहराई करीब 13 किलोमीटर दर्ज की गई। वहीं, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के घुट्टू स्टेशन पर भूकंप की तीव्रता 4.8 मैग्नीट्यूड रिकॉर्ड की गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप का केंद्र थराली के उत्तर में और बागेश्वर से करीब 30 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। ये इलाका हिमालय के सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में आता है। जहां भूगर्भीय हलचल के चलते समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं।
हिमालय में भूकंप की प्रमुख वजह
अगर हिमालय में भूकंप की प्रमुख वजह की बात करें तो भारतीय प्लेट हर साल करीब 3 से 4 सेंटीमीटर उत्तर या उत्तर-पूर्व की दिशा में बढ़ रही है। दोनों प्लेटों के बीच दबाव और घर्षण से ऊर्जा जमा होती रहती है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर निकलती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चमोली में 1999 में 6.6 मैग्नीट्यूड और 2017 में रुद्रप्रयाग क्षेत्र में 5.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप भी आ चुका है।
पूरा हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय रूप से सक्रिय
ये घटनाएं बताती हैं कि पूरा हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय रूप से सक्रिय है। लेनिक सबसे बड़ी चिंता भविष्य में आने वाले बड़े भूकंप को लेकर है। वैज्ञानिक अध्ययनों और पुराने आंकड़ों के आधार पर उत्तराखंड हिमालय में 7.5 से 8 मैग्नीट्यूड तक के भूकंप की आशंका जताई जाती रही है।
कभी भी थर्रा सकता है उत्तराखंड!
हालांकि, भूकंप कब आएगा, इसकी सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कम गहराई पर आने वाले भूकंप नुकसान की आशंका बढ़ा सकते हैं। मानसून के दौरान भूकंप की चुनौती और बढ़ सकती है। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में बारिश के कारण पहले से ही भूस्खलन का खतरा बना रहता है। ऐसे में अगर इसी दौरान बड़ा भूकंप आता है, तो पहाड़ों की ढलानों पर अस्थिरता बढ़ सकती है और भूस्खलन की घटनाएं तेज हो सकती हैं।
बड़े भूकंप का खतरा!
उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिले भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। राज्य के बड़े हिस्से को भूकंपीय जोन IV और V में रखा गया है। ऐसे में चमोली ओर उत्तरकाशी में आया ताजा भूकंप एक बार फिर चेतावनी देता है कि हिमालयी क्षेत्र में खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
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